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800 से 1500 पहुंचा राजकीय चिकित्सालय का आउटडोर

Hemant Kumar Joshi

Publish: Sep 19, 2019 11:23 AM | Updated: Sep 19, 2019 11:23 AM

Kuchaman City

कुचामनसिटी. 800 to 1500 outdoor state hospital arrived बारिश का मौसम बीत चुका है। मौसम में हो रहे बदलाव से वायरल बीमारियों का प्रकोप बढ़ा है। गंदे पानी में पनप रहे मच्छरों व कीटों से आम जन बीमार होने लगे है। औसतन हरघर में कोई एक सदस्य इन दिनों बुखार, जुखाम जैसी बीमारी से परेशान है।

800 to 1500 outdoor state hospital arrived शहर के सबसे बड़े राजकीय चिकित्सालय का आउटडोरा भी बढकर दोगुना हो गया है। गर्मी के मौसम में जहां औसतन 800 मरीज चिकित्सालय पहुंच रहे थे वहीं अब यह आंकड़ा 1500 तक पहुंच गया है। इसके अलावा कई मरीज निजी चिकित्सालयों की शरण ले रहे हैं।
क्षेत्र में दिन के समय जहां चटक धूप व गर्मी से आम जन परेशान है वहीं रात के समय ठण्डी हवाएं चलने से मौसमी बीमारियां बढी है। वायरल बुखार बारिश के बाद होने वाली प्रमुख समस्या है। वायरल इंफेक्शन के चलते सर्दी-जुकाम, खांसी, हल्का बुखार, हाथ पैरो व सिर में दर्द सहित अन्य बीमारियां हो जाती है। चिकित्सकों के अनुसार 800 to 1500 outdoor state hospital arrived असामान्य तरीके से बारिश मे भीगने, ठंडी हवा से, तापमान परिवर्तन, नींद पूरी न होने सहित अन्य कारण से शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र कुछ कमजोर हो जाता है। जिसके बाद हवा में फैले वायरस या दूषित और अशुद्ध खाद्य पदार्थ का सेवन करने से खाने पीने के सामान आदि के कारण वायरल बुखार हो सकता है। मौसम परिवर्तन के समय थोड़ी सी सावधानी के बाद वायरल रोग की चपेट में आने से बचा जा सकता है। चिकित्सकों के अनुसार खान-पान व रहन-सहन में सावधानी रखे तो वायरल रोग से बचा जा सकता है।
आउटडोर बढा लेकिन व्यवस्थाएं वही- शहर के राजकीय चिकित्सालय में मरीजों का आउटडोर तो बढ गया है लेकिन व्यवस्थाएं वही है। चिकित्सालय में व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। चिकित्सालय में दवा वितरण के लिए महज एक फार्मासिस्ट नियुक्त है। इसके अलावा चिकित्सालय में महज एक पुरानी सोनोग्राफी मशीन है। दूसरी नि:शुल्क जांचें भी समय पर नहीं होने से मरीजों को निजी जांच केन्द्रों की ओर जाना पड़ता है।

वायरल रोग व पहचान
जानकारी के अनुसार थोड़ी सी अनदेखी या लापरवाही के बाद 800 to 1500 outdoor state hospital arrived मौसम परिवर्तन के समय वायरल रोग हो सकता है। वायरल की चपेट में आने से तुरन्त चिकित्सक की सलाह पर उपचार लेना चाहिए। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सलीम राव ने बताया कि चढ़ते-उतरते तापमान के कारण सर्दी-जुकाम हो सकता है। खासतौर पर बच्चे इससे जल्द प्रभावित होते है। फ्लू व बुखार की शुरूआत अधिकतर गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों में सूजन व दर्द से होती है। दूषित भोजन व पानी का सेवन करने से हैजा हो सकता है। उल्टी आना, मुंह सूखना, डीहाइड्रेशन व निम्न रक्तचाप होना इस बीमारी के मुख्य लक्षण है। बारिश के मौसम में जल भराव व ठहराव के कारण मच्छर पनप सकते है। जिसके बाद मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारी हो सकती है। डेंगू वायरस संक्रमित मच्छर के काटने से होने वाली घातक बीमारी है। सामान्यत: इस बीमारी में बदन व जोड़ों में दर्द, बुखार एवं शरीर पर लाल चकते बन जाते है। पीलिया भी एक वायरल रोग है। इस रोग में लीवर ठीक ढंग से काम नहीं करता है। आंखों-नाखूनों व मुत्र का रंग पीला होना व अधिक कमजोरी इस रोग के मुख्य लक्षण माने जाते है।

थोड़ी सी सावधानी से बचा जा सकता है वायरल की चपेट में आने से
800 to 1500 outdoor state hospital arrived वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विजयकुमार गुप्ता ने बताया कि मौसम परिवर्तन के समय थोड़ी सी सावधानी रखे तो वायरल रोग की चपेट में आने से बचा जा सकता है। बारिश के मौसम में साफ.-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर सहित आसपास के स्थलों पर प्रयास करे कि गंदा पानी जमा नहीं हो। ऐसे स्थान पर मच्छर मारने वाली दवा का छिडक़ाव किया जाना चाहिए। जहां तक संभव हो ठंडे भोजन का सेवन न करे। पानी को उबालकर व अधिक से अधिक मात्रा में पीना चाहिए। बीमारी होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह व उपचार लेना चाहिए।

दवा नहीं, बीमारी लेकर पहुंच रहे मरीज

चिकित्सालय में सभी मरीजों को एक साथ भीड़ के रुप में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। जिससे मरीज उपचार के स्थान पर दूसरा वायरल इंफेक्शन लेकर घर जा रहा है। गौरतलब है कि मौसम के बदलाव के कारण फैल रही वायरल बीमारियां आपस के संपर्क से फैल रही है। वहीं दूसरी ओर चिकित्सालय में भी इंफेक्शन को रोकने के लिए प्रयास नगण्य के समान है।

इनका कहना-
चिकित्सालय में आउटडोर करीब 1500 तक हो गया है। चिकित्सालय आने वाले मरीजों को परामर्श दिया जा रहा है। लोगों को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरुक होने की जरुरत है। थोड़ी सावधानी रखकर वायरल बीमारियों की चपेट में आने से बच सकते है।
डॉ. शकील अहमद
प्रभारी, राजकीय चिकित्सालय, कुचामन