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ऐसा क्या है जिसे पिछले 18 साल से भुगत रहे नदीपार के लोग...जानिए

Mukesh Gaur

Publish: Oct 21, 2019 18:00 PM | Updated: Oct 21, 2019 18:00 PM

Kota

नए ट्रेंचिंग ग्राउंड की तलाश: स्टेट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रेग्युलरिटी कमेटी जारी कर चुकी है नान्ता में कूड़े की डंपिंग रोकने के निर्देश

 

कोटा. राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) और हाई लेवल स्टेट सॉलिड वेस्ट मैनेजेंट रेग्युलरिटी कमेटी की फटकार और आयुक्त पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के बाद भी नगर निगम और प्रशासन नान्ता ट्रेंचिंग ग्राउंड में कूड़े की डंपिंग बंद करने को राजी नहीं है। सियासी दबाव में नया ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थापित करने से कदम पीछे खींच चुके अफसर एक बार फिर अवैध ट्रेंचिंग ग्राउंड में शहर का कचरा डंप करने की तैयारी में जुटे हैं। कोटा के माथे पर 18 साल से लगा अवैध ट्रेंचिंग ग्राउंड का दाग मिटता नहीं दिख रहा।

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2001 में नगर निगम ने कूड़े का निस्तारण करने के लिए राजस्थान अर्बन इन्फ्रास्ट्रेक्चर डवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत बालिता में 25 हैक्टेयर, कुन्हाड़ी में 16 हैक्टेयर और नान्ता रोड की 16.3 हैक्टेयर जमीन पर ट्रेंचिंग ग्राउंड का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। सरकार ने उस वक्त बालिता और कुन्हाड़ी के प्रस्ताव को खारिज कर नान्ता में रिहाइश की उम्मीद न देख ट्रेंचिंग ग्राउंड की मंजूरी दे दी थी। नगर निगम ने वर्ष 2002 में प्राधिकार पत्र हासिल करने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) को नान्ता ट्रेंचिंग ग्राउंड की डीपीआर सौंपी थी, लेकिन बोर्ड ने जब ट्रेंचिंग ग्राउंड का स्थलीय निरीक्षण किया तो 32 बड़ी खामियां मिलीं। बोर्ड ने ऑर्गेनिक, रिसाइकल और बायोमेडिकल वेस्ट की छंटनी करने, वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने, ट्रेंचिंग ग्राउंड की पूरी जमीन पर सीमेंट की मोटी लेयर बिछाने, हाइवे के समानान्तर 20 मीटर जगह छोडऩे, ट्रेंचिंग ग्राउंड के चारों ओर ग्रीन बेल्ट तैयार करने, कचरे को हवा में उडऩे से रोकने और लीच्ड (गीले कचरे से रिसने वाला गंदा पानी) रिसाव को भूमिगत जल तक जाने से रोकने समेत 32 बड़े काम पूरे किए बिना निगम को प्राधिकार पत्र जारी करने से साफ इनकार कर दिया।


18 साल बाद भी अवैध
बावजूद इसके नगर निगम ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राधिकार पत्र हासिल किए बगैर ही नान्ता ट्रेंचिंग ग्राउंड में कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया। अराजकता की हद तो यह है कि नान्ता ट्रेंचिंग ग्राउंड की मियाद महज 14 साल थी, लेकिन 18 साल तक कूड़ा डालने के बाद भी निगम न तो प्राधिकार पत्र हासिल कर सका और न ही एक भी खामी दुरुस्त कर सका।


नान्ता में पसरा कैंसर
अफसरों की मनमानी का अंजाम नान्ता से लेकर कुन्हाड़ी तक के लोग भुगत रहे हैं। करीब दो दशक से एक ही जगह इक_ा हो चुके लाखों टन कूड़े के लीच्ड के रिसाव ने भूमिगत जलस्रोतों और हवा में उड़ रहे कचरे के बारीक कणों ने हवा में इस कदर जहर घोल दिया कि दस किमी के दायरे में रह रहे लोगों के फैंफड़े, दिल, दिमाग और गुर्दे ही खराब नहीं हो रहे, बल्कि कैंसर जैसी भयावह बीमारी तक घर-घर पैर पसार चुकी है। कोटा ओबस एंड गाइनिक सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. निर्मला शर्मा ने 2015 से लेकर 2017 तक ट्रेंचिंग ग्राउंड के नजदीक बसे रिहायशी इलाकों में हैल्थ सर्वे किया तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गरड़ा बस्ती, नान्ता पत्थर मंडी, कुन्हाड़ी सब्जीमंडी, नान्ता गांव और नान्ता चौराहे के साथ शहर का सबसे पॉश इलाका माने जाने वाली लैंडमार्क सिटी में रह रही 10 से 12 फीसद महिलाएं कैंसर का शिकार हो चुकी हैं, जबकि 20 से 25 फीसदी महिलाओं में कैंसर की बीमारी के शुरुआती लक्षणों की मौजूदगी पाई गई। उन्होंने वक्त रहते हालात दुरुस्त करने के लिए सर्वे रिपोर्ट सरकार को भी भेजी, लेकिन उस पर गौर करने की किसी को फुरसत तक नहीं मिली।

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सियासी दबाव में शहर से खिलवाड़
तत्कालीन कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल ने नए ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए नई जगह तलाशने को पांच टीमें गठित की थीं, लेकिन इनमें से सिर्फ लाडपुरा की टीम ही रूपारेल में 39 हैक्टेयर जमीन चिन्हित कर सकी। इसके बाद सियासी विरोध के चलते इस प्रस्ताव को भी ठंडे बस्ते में डाल जुलाई के महीने से जिला प्रशासन नई जमीन तलाश करने का दावा तो करता रहा, लेकिन हर जगह सियासी दबाव में हथियार डालने को मजबूर हो गया।


मुश्किल में फंसा निगम
शनिवार को जिला कलक्टर ओम कसेरा और निगम अफसरों ने नान्ता ट्रेंचिंग ग्राउंड के विस्तार का खाका तो खींच दिया, लेकिन अवैध ट्रेंचिंग ग्राउंड पर ही कूड़ा निस्तारित करने के फैसले से निगम मुश्किल में फंसता दिखाई दे रहा है। खाली जमीन पर कूड़ा फेंकने के लिए निगम को सबसे पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राधिकार पत्र लेना होगा। लगातार सख्त हो रहे पर्यावरण कानूनों को देखते हुए 32 खामियां दुरुस्त किए बगैर यह संभव नहीं है।