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ऐसा क्या हुआ कि घूस को मिला हजार गुना 'प्रमोशन'

Mukesh Gaur

Publish: Jan 18, 2020 18:42 PM | Updated: Jan 18, 2020 18:42 PM

Kota

चंद रुपयों की रिश्वत लाखों तक पहुंची : नियमों को ताक पर रखने से भी नहीं आ रहे बाज, तीन दशकों में सैकड़ों गुना बढ़ा भ्रष्टाचार के राक्षस का आकार

कोटा. राज्य में तीन दशक में रिश्वत का राक्षस अपना आकार सैकड़ों गुना बढ़ा चुका है। सरकारी महकमों में बढ़ता भ्रष्टाचार आमजन के लिए जख्म से नासूर बन चुका है। कभी विभागों में गिनी-चुनी संख्या में रहे भ्रष्टाचारी इस कदर बढ़े कि विभागों में अब भ्रष्टाचारियों से दूर चंद अफसर व कर्मचारी ही नजर आते हैं। बदहाली की हालत यह है कि तीन दशक पहले तक सरकारी दफ्तरों में ली जाने वाली रिश्वत की मामूली रकम अब बढ़कर लाखों रुपए हो चुकी है।
तीन दशक पहले तक जहां अधिकारी चंद रुपयों की रिश्वत लेने से भी डरते थे, वहीं अब भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी न केवल लाखों रुपए की रिश्वत ले रहे हैं, बल्कि विभागों के नियमों को ताक पर रखने से भी बाज नहीं आ रहे।

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केस 01
जयपुर में 10 जून 1988 को एसीबी सीकर ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के झुंझुनूं उपखंड के तत्कालीन सहायक अभियंता को 400 रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। तत्कालीन सहायक अभियंता ने रिश्वत की यह रकम ठेकेदार के बकाया बिलों के एवज में ली थी।
केस 02
जयपुर में 25 मई 2000 को केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने वायुसेना के तत्कालीन अभियंता को 25 हजार रुपए व तत्कालीन बैंक मैनेजर को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। वायुसेना का तत्कालीन अभियंता कार्यों की रिपोर्ट व भुगतान के एवज में व तत्कालीन मैनेजर ऋण जारी करने की एवज में रिश्वत मांग रहा था।

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केस 03
बारां में एसीबी ने 23 नवम्बर 2010 में सदर थाने के तत्कालीन सीआई व तत्कालीन एएसआई ने चोरी के मामले में नहीं फंसाने, दूसरे थाने की पुलिस को नहीं सौंपने, मारपीट नहीं करने, अदालत से जमानत करवाने के बदले 50 हजार रुपए की मांग की। इसमें तत्कालीन एसीबी ने ट्रेप की भनक लगने पर भागे तत्कालीन एएसआई को गिरफ्तार किया।

केस 04
कोटा सिटी एसीबी ने नारकोटिक्स विभाग के तत्कालीन उपायुक्त डॉ. सहीराम मीणा को 26 जनवरी 2019 को उसके आवास से 5 लाख रुपए की रिश्वत की मांग करने व एक लाख रुपए की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया। डॉ.सहीराम के पास निकली अरबों की सम्पति ने नारकोटिक्स में भ्रष्टाचार के खेल को बेनकाब कर डाला।
केस 05
कोटा सिटी एसीबी ने खनन विभाग के अधीक्षण खनिज अभियंता पन्नालाल मीणा को 25 दिसम्बर 2019 को उसके आवास से दो लाख रुपए की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया। पन्नालाल मीणा के पास भी अरबों रुपए की सम्पति के दस्तावेज मिले।

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