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मुम्बई से दिल्ली केवल 12 घण्टे में पहुचेंगे, रफ्तार योजना को हरी झंडी, बाधाएं बरकरार

Suraksha Rajora

Publish: Aug 19, 2019 22:26 PM | Updated: Aug 19, 2019 22:26 PM

Kota

delhi mumbai rout दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर सेमी हाईस्पीड ट्रेन से सात राज्यों को लाभ

 

कोटा. कोटा होकर दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर विद्युत इंजन से 170 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार का परीक्षण सफल होने के बाद दिल्‍ली-मुंबई मार्ग पर ट्रेनों की गति 160 किमी/प्रति घंटा बढ़ाने की योजना को हरी झंडी तो मिल गई, लेकिन बाधाएं दूर करने के लिए रेलवे ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।

अब दिल्ली दूर नही, मुम्बई से दिल्ली केवल 12 घण्टे में पहुचेंगे,160 की स्पीड से दौड़ेंगी ट्रेनें


दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर कैटल रनआेवर की समस्या ज्यादा होने से ट्रेनों की गति प्रभावित होती है। कोटा मंडल में प्रतिदिन ५ से ६ कैटल रनओवर होते हैं। हर सप्ताह ३५ से ४० मवेशी ट्रेनों से टकराते हैं। इसके बाद भी तारबंदी नहीं की जा रही। कोटा से मुंंबई तक हर सप्ताह कैटल रनओवर की ८० से १०० घटनाएं होती है। इससे ट्रेनों की गति और संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा छोटी उदेई के पास रफ्तार पर लगा स्थायी प्रतिबंध नहीं हटा है।

पैसेंजर गाडि़यां भी तेज होंगी

रेलवे सूत्रों के अनुसार दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर सेमी हाई स्पीड ट्रेनों की रफ्तार १६० किमी प्रतिघंटा किए जाने के बाद पैसेंजर ट्रेनों की औसत गति में भी 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है। रेलवे सूत्रों के अनुसार ट्रेनों की रफ्तार बढऩे से वर्ष 2022-23 तक मालभाड़ा यातायात की औसत गति भी दोगुनी हो जाएगी।

नई दिल्‍ली और मुंबई के बीच यात्रा के समय में साढ़े तीन घंटे की कमी आएगी। इस मार्ग की कुल लंबाई 1483 किमी है। यह सात राज्‍यों दिल्‍ली, उत्‍तर प्रदेश हरियाणा, राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश, गुजरात और महाराष्‍ट्र से होकर गुजरता है। इस परियोजना से क्षमता निर्माण, गति और सुरक्षा में वृद्धि होगी।

स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली होगा प्रयोग

सरकार ने 2022-23 तक 6,806 करोड़ रुपए की लागत से दिल्ली-मुम्बई और वडोदरा-अहमदाबाद सहित कई मार्गों की गति बढ़ाकर 160 किमी प्रति घंटा करने के लिए स्वीकृति दी है। रेलवे द्वारा किए जा रहे कार्याें में तारबंदी, स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली, मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार और स्वचालित और यंत्रीकृत नैदानिक प्रणालियां शामिल हैं। इनसे सुरक्षा और विश्वसनीयता में बढ़ोतरी होगी। सभी प्रकार के समपार फाटक भी हटाने होंगे।


रेलवे ट्रेक पर मवेशी नहीं आए, इसके लिए जागरुकता अभियान चलाया जाता है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से भी लोगों से अनुरोध किया जाता है। इसके अलावा ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने से पहले तारबंदी की योजना भी प्रस्तावित है।

-विजय प्रकाशक, सीनियर डीसीएम, कोटा रेल मंडल