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आवारा मवेशियों के चलते जान पर बन आई

Mukesh Gaur

Publish: Aug 14, 2019 17:55 PM | Updated: Aug 14, 2019 19:02 PM

Kota

शनिवार को कैथून से लौटते हुए आवारा मवेशियों की चपेट से हुई थी घायल

कोटा. फिर एक मौत, धरना-प्रदर्शन, शिकवे-शिकायतों को दौर और उसके बाद बेशर्म सी चुप्पी...। शहर में आवारा मवेशियों के कारण होने वाली मौतों का सिलसिला यूं ही बढ़ता रहेगा, जिम्मेदार अफसर, शासन-प्रशासन को शायद अब भी कोई फर्क न पड़े। कौन है इसका जिम्मेदार। चार दिन पहले आवारा मवेशियों से टकराकर घायल हुई सीमा अब भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है।


ऐसे हुआ था हादसा
कैथून थाना क्षेत्र के दीगोद बड़ा तालाब निवासी पति योगेंद्र (42) के साथ बाइक से कोटा आ रही सीमा तीन दिन पहले जगन्नाथपुरा पुलिया पर शनिवार को सड़क लड़ते हुए मवेशियों की चपेट में आने से गंभीर घायल हो गई थी। इसके बाद उसे पति के साथ उपचार के लिए एमबीएस चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया था। परिजनों ने बताया कि घटना के बाद ही सीमा (38) अचेत हो गई थी। उसके सिर के पिछले हिस्से में गंभीर चोंटे थीं। इसके बाद उसके होश नहीं आया और उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। इस पर परिजन उसे उपचार के लिए निजी चिकित्सालय में ले आए थे।


फील्ड में नहीं निकल रहे निगम के अफसर
शहर में आवारा मवेशियों की समस्या आज से नहीं, कई सालों से है। हर बार बारिश में नगर निगम की ओर से सड़कों से आवारा मवेशियों को भगाने के लिए होमगार्ड व अन्य गार्ड लगाए जाते थे, जो दिनरात मवेशियों को सड़कों से भगाते थे, लेकिन इस बार होमगार्ड लगाने की फाइल अधिकारियों ने अब तक दबा रखी है। ठेकेदार को प्रतिदिन 15 मवेशी पकडऩे का जिम्मा सौंप दिया है। ठेकेदार के काम को देखने वाला कोई नहीं है। कुछ साल पहले तो निगम आयुक्त, उपायुक्त रात को टीम के साथ सड़कों पर होते थे। तत्कालीन उपायुक्त राजेश डागा तो पूरी रात सड़कों पर आवारा मवेशियों को पकडऩे वाली टीम के साथ मौजूद रहते थे। इसमें पार्षदों का भी सहयोग लिया जाता रहा है।

शहर को इस समस्या से स्थायी समाधान दिलाने के लिए पुरजोर प्रयास किए जाएंगे।
महेश विजय, महापौर