स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

वाहन चलाते समय झपकी लगी तो आपको जगा देगा ये खास चश्मा, जानिए कैसे करता है काम

Zuber Khan

Publish: Sep 23, 2019 08:30 AM | Updated: Sep 23, 2019 00:55 AM

Kota

वाहनों को ड्राइव करते समय यदि नींद की झपकी लग जाए तो यह स्पेशल चशमा आपको जगा देगा।

कोटा. कार व अन्य वाहनों को ड्राइव ( vehicle driving ) करते समय कई बार झपकी लग जाती है। खास तौर पर लंबी दूरियों तक वाहन चलाने व नींद पूरी नहीं होने के कारण आने वाली पलभर की यही झपकी कई बार जीवन पर भारी पड़ जाती है। ( Road Accident ) किन अब एक विशेष प्रकार का चश्मा ( Special glasses ) वाहन चलाते समय आपको झपकी लगने ही नहीं देगा। जी हां, यह चश्मा आपको झपकी लगते ही जगा देगा। विज्ञान नगर निवासी 11वीं कक्षा के विद्यार्थी प्रत्युष सुधाकर ने एक ऐसा ही विशेष चश्मा तैयार किया है। यह चश्मा वाहन चलाते समय चालक को नींद से जगा देगा। इससे झपकी लगने के होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।

Read More: खण्डहर में तब्दील हुए सपनों के आशियानें, तबाही का मंजर देख कांप उठा कलेजा, तस्वीरों में देखिए विनाशलीला...

इसलिए बनाया यह चश्मा
प्रत्युष बताते हैं कि वाहन चलाते समय नींद आने से होने वाली दुर्घटनाओं का आंकड़ा काफी बड़ा है, जो चिंता का विषय है। गाड़ी में अन्य सवारियों की जिदंगियां भी चालक की सुरक्षात्मक ड्राईविंग पर निर्भर करती है। सीआर आर आई (सेन्ट्रल रूट रिसर्च सेंटर) लखनऊ ( central route research center lucknow ) के एक सर्वे के मुताबिक 20 फीसदी सड़क दुघटनाऐं वाहन चलाते समय नींद या झपकी लगने से होती हैं। इसे देखते हुए प्रत्युष के मन में इस तरह का उपकरण बनाने का विचार आया।

Read More: खौफनाक मंजर: चंबल की उफनती लहरें किनारे लौटी तो पीछे छोड़ गई तबाही के निशां, तस्वीरों में देखिए विनाशलीला

वर्कशॉप का मिला फायदा

प्रत्युष ने गत वर्ष जुलाई में साइंस की वर्कशॉप में भाग लिया था। इसमें वन लाइनर रोबोट बनाना सीखा। इससे विचार आया कि क्यों ने रूट सेफ्टी डिवाइस बनाया जाए। इस पर कार्य करना शुरू कर दिया। इसे तैयार करने में छह माह लगे। प्रत्युष के पिता आशीष सुधाकर एचडीएफसी बैंक में मैनेजर हैं। जबकि मां ममता सक्सेना दादाबाड़ी स्थित बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में फिजिक्स की व्याख्याता हैं।

Read More: दर्द-ए-हाल: बदन पर कपड़े ही बचे, बाकी सब कुछ डूबा, गहनों के साथ विवाह की यादों को भी बहा ले गया सैलाब...

ऐसे काम करता है यह चश्मा
व‍िज्ञान के विद्यार्थी प्रत्युष सुधाकर ने बताया कि यह चश्मा विज्ञान के आर्डिनो सिद्धांत पर कार्य करता है। यह कम्प्यूटराईज्ड सॉफ्टवेयर पर आधारित है। इसमें कुछ छोटे-छोटे उपकरण लगाए गए हैं। चश्मे पर एक आईआर सेंसर लगा है। एक ग्लास पर छोटी टॉर्च के बल्ब नुमा एक आईआर एलईडी व फोटो डायोड है। जैसे ही झपकी आने पर पलकें बंद होती है तो यह मैसेज फोटो डायोड ले लेता है। इस तरह प्राप्त सिग्नल चश्में में लगाए अन्य उपकरण आर्डिनो नेनो के माध्यम से वाइब्रेटर व बजर को मिलते हैं। इससे वाईब्रेशन के साथ तेजी से सायरन बजने लगता है। वाइब्रेशन व साइरन की तीव्रता चालक की नींद को उड़ा देती है।