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गण के तंत्र: वतन पर न्यौछावर की चार पीढिय़ां, मुल्क के लिए लड़ा हर युद्ध,पिता पुत्र ने साथ लड़े थे तीन युद्ध

Suraksha Rajora

Publish: Jan 26, 2020 09:00 AM | Updated: Jan 25, 2020 21:05 PM

Kota

Republic Day तीसरी पीढ़ी ने कॉरगिल में संभाला मोर्चा, चौथी पीढ़ी मल्टी नेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ नेवी में हुई भर्ती

कोटा. चिट्ठियों के इंतजार में कई मर्तबा कई महीने गुजर जाते... रात रात करवटें बदलकर कटतीं, लेकिन अचानक किसी रोज जब आधी रात में फोन की घंटी बज उठती तो तमाम शंका और आशंकाओं से कलेजा धक से बैठ जाता... बिस्तर से उठकर फोन का चोगा उठाने तक सफर किसी पहाड़ चढऩे से कम न होता... फिर भी फक्र है कि मैं उस परिवार का हिस्सा हूं जिसने वतन की हिफाजत के लिए एक दो बच्चे नहीं बल्कि चार पीढिय़ां अर्पित कर दीं।


परिवार की थाथी बयां करते हुए आर्मी स्कूल कोटा की शिक्षिका सुमिता नेहरा की आंखों की चमक देखते ही बन रही थी। नेहरा परिवार की बहू ने राष्ट को समर्पित चार पीढिय़ों वाले गौरवशाली फौजी परिवार की कहानी बयां करते हुए राजस्थान पत्रिका को बताया कि झुंझनू के छोटे से गांव दीवलावास के रहने वाले राम नारायण सिंह नेहरा ने अंग्रेजों के जमाने में ही फौज ज्वाइन कर ली।

आजादी के बाद वह जाट रेजीमेंट में शामिल हो गए और सूबेदार के पद से सेवानिवृत हुए। उन्होंने वर्मा युद्ध से लेकर भारतीय सेना की ओर से वर्ष 1962, 1965 और 1971 में चीन एवं पाकिस्तान से हुए युद्ध लड़े।

पिता पुत्र ने साथ लड़े
सुमिता नेहरा ने बताया कि सूबेदार राम नारायण सिंह ने अपने बेटे देशराज सिंह को भी मातृभूमि की रक्षा में अर्पित कर दिया। बतौर सैनिक सेना में भर्ती हुए उनके बेटे देशराज सिंह और पिता राम नारायण सिंह नेहरा ने 62, 65 और 71 की लड़ाइयां साथ साथ लड़ीं।

ईएमई से बतौर केप्टन सेवानिवृत हुए देशराज सिंह नेहरा की पत्नी संतरा देवी ने बताया कि 65 की लड़ाई में जब फौजी युद्ध पर जाने लगे तो उनके परिवार सहम गए थे, लेकिन हमारे परिवार में जश्र का माहौल था क्योंकि दोनों पिता पुत्र दो मोर्चों पर एक साथ लडऩे जा रहे थे जिसे सूबेदार राम नारायण सिंह बहुत बड़ी खुशकिश्मती मानते थे।

कारगिल में उतरी तीसरी पीढ़ी
सुमिता नेहरा ने बताया कि दादा की प्रेरणा से उनके नाती और मेरे पति कर्नल राज करण सिंह नेहरा ने सेना में कमीशन हासिल किया। तीसरी पीढ़ी जब फौज में गई तो गांव में दीवाली मनाई गई थी। कर्नल राज करण सिंह ऑपरेशन पराक्रम और कारगिल वॉर से लेकर कई आंतकी मिशनों में शामिल हो चुके हैं। जिसके लिए उन्हें सेना की ओर से कमांडर पदक और पराक्रम पदक से पुरस्कृत भी किया जा चुका है।

चौथी पीढ़ी ने पहनी वर्दी
सुमिता नेहरा ने बताया कि बेटी और बेटो को इंजीनियरिंग कराई। बेटा एनआईटी मुम्बई से पास आउट होने के बाद मल्टी नेशनल कंपनी में चला गया, लेकिन वहां उसका मन नहीं लगा और आखिर में उसने भी अपने पिता एवं दादा का रास्ता चुनते हुए भारतीय नौसैना में कमीशन हासिल किया। वर्ष 2017 में बतौर केप्टन भारतीय नौसेना ज्वाइन कर ली।

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