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नहरों के पानी के लिए राजावत ने 9 साल पहले रोकी थी रेल, अब आया कोर्ट का फैसला

Rajesh Tripathi

Publish: Nov 13, 2019 21:13 PM | Updated: Nov 13, 2019 21:13 PM

Kota

पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत व साथी न्यायालय से बरी

 

कोटा. नहरों से पानी छोडऩे की मांग को लेकर कोटा जंक्शन पर रेल रोकने के मामले में पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत और उनके साथियों को बुधवार को रेलवे कोर्ट ने बरी कर दिया है। वर्ष 2010 में कांग्रेस शासन के दौरान सिंचाई के समय प्रशासन द्वारा नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने के विरोध में तत्कालीन लाडपुरा विधायक भवानी सिंह राजावत ने रेल रोको आंदोलन किया था ।

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आंदोलन के दौरान राजावत समर्थकों ने रेलवे स्टेशन पर इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन के इंजन पर चढ़कर रेल रोक दी थी। उसके बाद आरपीएफ और पुलिस द्वारा भारी लाठीचार्ज किया गया था। रेलवे ने इस आंदोलन के लिए कुल 23 व्यक्तियों को नामित कर उनके विरूद्ध रेलवे की पटरी पर आने के लिए भारतीय रेल अधिनियम की धारा 147 और रेल रोकने के लिए धारा 174 के तहत प्रकरण दर्ज किया था।

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9 वर्ष तक यह प्रकरण कोटा रेलवे न्यायालय में चलता रहा जिसमें बुधवार को न्यायालय में पेश हुए पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत, मुकुट नागर, नन्दलाल मीणा, गोपेश मालव, संतोष बैरवा, पार्षद गिरिराज महावर, हुसैन मोहम्मद, सतीश भारद्वाज, उम्मेद सिंह हाड़ा, जगतेज सिंह बराड़, बृजमोहन नागर, मुकेश नागर सहित कुल 14 व्यक्तियों को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने इन सभी व्यक्तियों को धारा 12 का लाभ भी दिया है जिसके तहत इन व्यक्तियों को किसी भी सेवा अथवा निर्वाचन के लिए इस प्रकरण के कारण अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा।

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