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बच्चों की जान बचाने 7 घंटे में 113 किमी दौड़ा पिता, राजस्थान-मध्यप्रदेश में नहीं मिला इलाज, बाप की गोद में टूटा बेटा-बेटी का दम

Zuber Khan

Publish: Nov 11, 2019 08:00 AM | Updated: Nov 11, 2019 00:35 AM

Kota

राजस्थान के बारां जिले में बच्चों को बचाने के लिए प‍िता 113 किलोमीटर दौड़ा फिर भी बेटा-बेटी को नहीं बचा सका। 7 घंटे में पूरा परिवार बिखर गया।

बारां/देवरी. कुपोषित छोटे भाई-बहनों ( malnourished Brother-sister ) के पिता रामभजन पर शुक्रवार को 'वो' सात घंटे भारी रहे। इस दौरान वह इलाज कराने के लिए गांव से बारां तक 113 किमी की दौड़ भाग कर दोनों बच्चों को लेकर चिकित्सक व अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा। ( Malnourished Children Dead ) सुबह करीब नौ बजे दोनों बच्चों को लेकर रामभजन देवरी कस्बे में पहुंच गया था। उसके बाद शाहाबाद अस्पताल होते हुए बारां जिला चिकित्सालय पहुंचने में शाम के चार बज गए। इस दौरान रास्ते में पिता की गोद में ही बेटी की सांसें उखड़ गई, जिला चिकित्सालय पहुंचते ही उसे मृत घोषित कर दिया था।

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मात्र 24 घंटे के दौरान दोनों बच्चे हाथ से निकल गए थे। काश शाहाबाद में उपचार मिल जाता तो संभवतया बच्चों की मौत नहीं होती। ( Malnourished diseases in Children ) इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। रविवार को भी उनके गांव में सन्नाटा पसरा रहा, परिजन विलाप करते रहे। ( Malnourished diseases in Rajasthan ) इस मामले में विड़म्बना यह रही कि रामभजन का गांव टूकी मध्यप्रदेश में होने के साथ बारां जिले की सीमा से सटा हुआ है, लेकिन दोनों ही प्रदेशों में उसके बच्चों को उपचार नहीं मिला।

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देवरी, शाहाबाद, बारां व कोटा तक दौड़
पीडि़त रामभजन कुशवाह ने बताया कि बुधवार को दोनों बच्चों को बुखार आने पर उसने समीप ही छर्च गांव में चिकित्सकों को दिखाया था। बाद में तबीयत बिगडऩे पर शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे देवरी कस्बे में निजी क्लीनिक पर दिखाया, लेकिन बच्चों की हालात में सुधार नहीं हुआ, चिकित्सक ने रैफर कर दिया। वह दोनों बच्चों को लेकर शाहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द पहुंचा। वहां करीब एक घंटे तक बच्चों को भर्ती रखा गया, लेकिन हालत नहीं संभली। चिकित्सकों ने आनन-फानन में शुक्रवार को ही एम्बुलेंस से बारां रैफर कर दिया। बारां पहुंचने से पहले शुक्रवार शाम उसकी पुत्री चन्द्रावली (3 वर्ष) की मौत हो गई। रिंकू उर्फ कुलदीप (8 वर्ष) को रैफर कर दिया। रिंकू की शनिवार सुबह करीब 10 बजे कोटा में उपचार के दौरान मौत हो गई।


होडापुरा में हुई थी बुआ की शादी
चिकित्सा सूत्रों ने बताया कि मृतक दोनों बच्चे उनके माता-पिता के साथ होडापुरा के समीप मध्यप्रदेश राज्य के टूकी गांव में रहते थे। पिता रामभजन भी टूकी में ही रहकर मेहनत मजदूरी करता है। रामभजन की बहन की शादी होडापुरा गांव में हुई थी। बाद में उनका सम्बंध विच्छेद हो गया।

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80 घरों को किया सर्वे
चिकित्सा टीम ने होडापुरा गांव में करीब 80 घरों का सर्वे किया। कुछ बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। टीम में चिकित्साधिकारी, चौराखाड़ी की एएनएम सुनीता सहरिया, आशा सहयोगिनी विमला बाई आदि शामिल थे। टीम ने वार्ड पंच किशोरीलाल व ग्रामीण लक्ष्मीनारायण, बंटी, हजारी व लच्छी आदि से चर्चा कर मृतक बच्चों के परिवार के बारे में जानकारी ली।

जिला कलक्टर के निर्देश पर रविवार सुबह होडापुरा में टीम भेजी गई थी। बच्चे मप्र के टूकी गांव निवासी होने की जानकारी मिली। होडापुरा गंाव में करीब 80 घरों का सर्वे किया। बच्चों की स्क्रीनिंग की गई।
डॉ. सम्पतराज नागर, सीएमएचओ, बारां

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