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कोटा में बाढ़ पर कोर्ट सख्त..आदेश की पालना की होती तो न होते ये हालात, अब देना पड़ेगा जवाब

Rajesh Tripathi

Publish: Sep 18, 2019 20:27 PM | Updated: Sep 18, 2019 20:27 PM

Kota

कोर्ट ने मांगा जवाब, क्यों नहीं हुई न्यायालय के आदेश की पालना, न्यायालय
ने कलक्टर, निगम आयुक्त व न्यास सचिव से जवाब तलब

कोटा. सिविल न्यायालय के न्यायाधीश ने अधिवक्ता की ओर से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर चंबल नदी के किनारे बसी डूब क्षेत्र की बस्तियों के लोगों को विस्थापित कर सुरक्षित स्थान पर बसाने के स्थाई लोक अदालत के आदेश की पालना नहीं होने के मामले में जिला कलक्टर, निगम आयुक्त व न्यास सचिव से 20 सितम्बर तक जवाब तलब किया है।

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अधिवक्ता लोकेश कुमार सैनी ने सिविल न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में बताया कि उन्होंने चंबल किनारे बसी बस्तियों में बैराज के गेट खोलने पर जलमग्न होने, मकानों व आर्थिक नुकसान होने को लेकर इन बस्तियों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के लिए स्थाई लोक अदालत में 13 जून 2017 को प्रार्थना पत्र पेश किया था। इस मामले में स्थाई लोक अदालत ने मामले में 22 अपे्रल 2018 को अवार्ड पारित कर अप्रार्थियों को बरसात से पूर्व चंबल किनारे अवैध रूप से रहने वाले लोगों को वहां से हटाने व चंबल के दोनों और रहने वाले स्थायी रहवासियों को चंबल से पानी छोडऩे की पूर्व सूचना देने के आदेश दिए थे, लेकिन आदेश के बाद करीब डेढ़ वर्ष का समय निकलने के बाद भी आदेश की पालना नहीं की गई। अधिवक्ता ने स्थाई लोक अदालत के आदेश की पालना करवाने की मांग की। इस मामले में न्यायालय ने जिला कलक्टर, यूआईटी सचिव व निगम आयुक्त से 20 सितम्बर को जवाब तलब किया।