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कोटा में बरसी ग़ज़लों की बारिश

Deepak Sharma

Publish: Aug 19, 2019 20:04 PM | Updated: Aug 19, 2019 20:04 PM

Kota

कोटा राइटर्स हब और विरसा पोएट्री ग्रुप की और से शहर के ब्राह्मण सामुदायिक भवन में कारवाँ नामक कवि सम्म्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया।

कोटा . कोटा राइटर्स हब और विरसा पोएट्री ग्रुप की और से शहर के ब्राह्मण सामुदायिक भवन में कारवाँ नामक कवि सम्म्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में जलगाँव महाराष्ट्र से आमंत्रित शायर ज़ुबैर अली ताबिश ने अपनी ग़ज़लों से शेर शायरी से खूब वाह वाही लूटी और दर्शकों को खड़े होने पर मज़बूर कर दिया। उनकी ग़ज़लों में "हाल न पूछो मोहन का सबकुछ राधे-राधे है, "वो दुल्हन बन के रुख़सत हो गयी है कहाँ तक कर का पीछा" करोगे, "भीड़ तो ऊँचा सुनेगी दोस्त," ये जो रावण जलाने वाले है सबके सब रावण थे पहले आदि शेर कहे"

साथी शायरों में दिव्य कमलध्वज ने अपनी ग़ज़ल" मैं जहाँ की सारी बन्दिश तोड़ के आजाऊँगा सुना कर महफ़िल को एक नया रंग दिया, तनोज दाधीच ने अपने शेर के मिसरे 'अगर तुम शायरी करती 'से लोगों को उनके साथ शेर कहने को आमंत्रित किया,
राज मोनिल श्रीवास्तव ने" उसको उसका यार मुबारक़ ,हम थे दिल बहलाने वाले वाले" शेर सुनाया, उज्जैन से पधारे शायर हर्षद बी. तिवारी ने अपने शेर "पहले मैं उसको काजल बनाता बाद उसके एक बादल बनाता सुनाया, "

सौम्य यादव ने किसी की आँख पर यह तैर सकता है फ़क़त पानी में तेरा राम का पत्थर शेर सुनाया, कविश कुमार ने अपने शेर " इत्र हूँ बिन खुश्बू का शीशियों के बीच में सुनाया, मुशायरे का संचालन कोटा के ही शायर हिमांशु पांडेय ने किया जिन्होने अपने शेर मैं तैश में आ गया तो रिश्ता बिगाड़ लूँगा सुनाकर समा बांधा ।

कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक शर्मा ने बताया की ऐसे कार्यक्रम उभरते हुए शायरों को एक नया मंच प्रदान करते है और ग़ज़ल, कविताओं से नयी पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास करते हैं सह संयोजक अर्जुन सिंह पटेल ने कहा कार्यक्रम में लोगों के नए शायरों को बख़ूबी सुना और दाद दी। कार्यक्रम में मुख्यातिथि सी.ए. रोहित माखीजा, विशाल वाधवानी,एवम अनुजा मेवाड़ा रहे।