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स्वीकृति मिले तो खत्म हो बिजली समस्या

Anil Sharma

Publish: Sep 22, 2019 00:30 AM | Updated: Sep 22, 2019 00:30 AM

Kota

बोराव क्षेत्र में बरसों पुरानी बिछी है विद्युत लाइन, आए दिन होते हैं फाल्ट, ग्रामीण परेशान, वन विभाग नहीं दे रहा स्वीकृति, विद्युत निगम का अटका हुआ है काम....

रावतभाटा. बोराव क्षेत्र में वन विभाग ने वर्ष १९७७ में विद्युत सप्लाई के लिए लाइनें बिछवाई थी, जिनके भरोसे ही वर्तमान में भी करीब 50 गांवों में आपूर्ति हो रही है। बरसों पुरानी लाइन होने के कारण इसमें बार-बार फाल्ट हो जाते हैं। इससे लोगों को कई बार घंटों आपूर्ति सुचारू होने का इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि यह इलाका वन क्षेत्र में है, लेकिन वन विभाग लाइन बदलने की स्वीकृति विद्युत वितरण निगम को नहीं दे रहा है।
जानकारी के अनुसार 132 बाडोलिया जीएसएस से 33 केवी बोराव जीएसएस में सप्लाई दी जाती है। विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों का कहना है कि निगम की ओर से समय-समय पर पुरानी लाइनों को बदलने का काम किया जाता है, लेकिन बाडोलिया जीएसएस से बोराव क्षेत्र में जाने वाली 15 किलोमीटर बिजली की लाइन मुकुन्दरा व भैंसरोडगढ़ वन्य क्षेत्र से 180 लोहे के पोल के ऊपर से होकर निकल रही है। उक्त लाइन वर्ष 1977 में बिछाई गई थी। तब से बदली नहीं है। हालात यह है कि वर्तमान में लाइन काफी पुरानी हो गई है। पोल भी जंग खा गए हैं। टेडे मेड़ भी हो गए हैं। लाइन पुरानी होने से आए दिन तार टूटकर गिर जाते हैं। वहीं आपस में टकरा जाते, जिससे लाइनों में फाल्ट होते रहते हैं। तार गिरने से कई बार जानवरों की मौत तक हो गई। कई लोग बाल-बल बच गए। इन सबके बावजूद वन विभाग लाइनें बदलने की स्वीकृति नहीं दे रहा। इससे 50 गांवों के लोग परेशान है।

विद्युत निगम के अधिकारियों का कहना है कि नए टावर व लाइन बदलने पर करीब ढाई करोड़ करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसको लेकर राशि भी स्वीकृति हो गई है, लेकिन वन विभाग की ओर से स्वीकृति नहीं मिल रही है।

कार्य बीच में अटका

जहां-जहां पर वन भूमि नहीं थी। वहां से लाइन व टावर बदल दिए हैं। बाकी जगह स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्य होगा। उक्त इलाके में 15 किलोमीटर लाइन बिछाई जाएगी। लोहे के पोलों के स्थान पर टावर लगेंगे। क्षेत्र में 300 टावर लगने से हैं। इनमें से 125 टावर लगा दिए हैं। अभी भी 185 टावर बदलना बाकी है।

इतने हैं कनेक्शन प्रभावित

निगम के अधिकारियों का कहना है कि उक्त लाइन से घरेलू व कृषि कनेक्शनधारक प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से 800 कृषि कनेक्शन व 5 हजार घरेलू कनेक्शन हैं।