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10 बीघा जमीन के लिए छोटे भाई को दी ऐसी यातनाएं कि बेटी भूल गई बाप का चेहरा, खौफनाक है मुकेश की कहानी

Zuber Khan

Publish: Aug 24, 2019 11:13 AM | Updated: Aug 24, 2019 11:13 AM

Kota

Human story: जमीन के लालच में परिजनों ने मानसिक रूप से कमजोर घर के सदस्य को ऐसी सजा दी कि देखने वालों की रूह तक कांप उठे।

पत्रिका में खबर छपने के बाद पुलिस ने ही छुड़ाया

कोटा . कोटा की पुलिस ( kota police ) किस तरह से काम कर रही है। इसकी बानगी बेडिय़ों में बंधे मिले मुकेश गुर्जर ( Man tied With chains ) मामले में भी सामने आई है। कोटा रेंज के सबसे बड़े अधिकारी के दफ्तर में सूचना देने के बाद भी पुलिस कागज को दबा कर बैठी रही और पीडि़त मुकेश बेडिय़ों में बंधा रहा।

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मुकेश गुर्जर की पत्नी ने 50 दिन पहले आईजी बिपिन पाण्डेय के दफ्तर में अर्जी दे दी थी। जिसमें साफ-साफ लिखा था कि ससुराल वालों ने उसके पति मुकेश को बंधक बना कर रखा है। उसनेपति के भाइयों, भाभी और अन्य रिश्तेदारों पर आरोप भी लगाए थे, लेकिन आईजी को शिकायत देने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मुकेश की पत्नी सीता ने शिकायत में बताया कि पलायथा में उसके पति के नाम पर दस बीघा जमीन है। इस जमीन के चक्कर में मुकेश को बांध कर रखा जा रहा है।

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सीता गुर्जर ने पत्रिका को बताया कि वे जिस दिन आईजी कार्यालय में गई थी। तब आईजी वहां मौजूद नहीं थे। इस पर वहां मौजूद एक अधिकारी को प्रार्थना पत्र दे कर आ गई। साथ ही प्रार्थना पत्र पर पावती की रसीद भी दे दी गई। उन्होंने बताया कि इसके बाद वे मान चुकी थी कि पुलिस कार्रवाई करेगी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्हें लगा कि पुलिस 'मैनेज' हो गई है। ऐसे में दुबारा शिकायत करने का कोई लाभ नहीं। दुबारा शिकायत नहीं की। मुकेश अभी अपना घर में रह रहा है। संस्था के सचिव मनोज जैन आदिनाथ ने बताया कि मुकेश को डॉक्टर को दिखाया है, जहां से उसे डेढ़ महीने की दवा दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि उपचार से उसकी बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। मजेदार बात यह कि राजस्थान पत्रिका में समाचार प्रकाशित होने के बाद कुछ घंटों में ही पुलिस मुकेश को रिहा करा ले आई।

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बेटी को नहीं याद पिता का चेहरा
नौ साल की बेटी तनु को अपने पिता का चेहरा याद नहीं है। उसकी मां सीता का कहना है कि मुकेश शुरू से ही मानसिक रोगी है। उसका उपचार चलता था। तनु के जन्म के तीन महीने पहले ही सीता को मारपीट कर भगा दिया था। सीता ने बताया कि इसके बाद से ही वह मुकेश को आजाद करा कर अपने साथ ले जाने के प्रयास कर रही थी। इस बात को नौ साल हो गए। नौ साल की बेटी को अपने पिता का चेहरा तक याद नहीं है। तनु ने बताया कि बहुत साल पहले अपने पिता को एक बार देखा था, लेकिन चेहरा याद नहीं है।

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पति को नहीं ले जाने दिया
सीताबाई और उनके भाई शिवराज ने बताया कि राजस्थान पत्रिका से मुकेश के बंधे होने और उसकी रिहाई की जानकारी मिली। इस पर वे अनंतपुरा थाने पहुंचे। वहां से उन्हें अपना घर भेज दिया गया। इसके बाद वे पत्रिका कार्यालय पहुंचे। सीताबाई का कहना है कि वह मुकेश को पीहर में ले जाकर इलाज कराना चाहती थीं, लेकिन ससुराल वालों ने पति को ले जाने भी नहीं दिया।

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मानसिक रोगी को किसने और क्यों बांधकर रखा, इसे दिखवाते है। मामले को दिखवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मेरे कार्यालय में आई शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इसकी भी जांच कराएंगे।
बिपिन कुमार पाण्डेय, महानिरीक्षक, कोटा रेंज