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परीक्षा सिर पर, बगैर किताब कैसे पढ़ेंगे प्रदेश के 30 हजार बच्चे

Mukesh Gaur

Publish: Jan 22, 2020 18:21 PM | Updated: Jan 22, 2020 18:21 PM

Kota

राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल का मामला

कोटा. राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल के माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। परीक्षा सिर पर है, लेकिन अभी पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ऐसे में बच्चों की चिंता बढ़ गई है। विद्यार्थी रोजाना नोडल केन्द्रों पर चक्कर लगा रहे है। प्रवेश के तीन माह गुजरने के बावजूद उन्हें किताबें नहीं मिल रही हैं। ऐसे में पढ़ाई कैसे होगी, जबकि मार्च में परीक्षा होनी हैं। स्टेट ओपन स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया जुलाई-अक्टूबर में ही पूरी हो गई। बोर्ड को किताबें अक्टूबर तक विद्यार्थियों को उपलब्ध करवानी थी। जिले में 11 संदर्भ केन्द्र हैं। इसमें पांच हजार विद्यार्थी हैं। प्रदेश की बात करें तो करीब 30 हजार से अधिक विद्यार्थी पाठ्यपुस्तकों के लिए विद्यालयों में लगातार सम्पर्क कर रहे हैं।

सम्पर्क कक्षाएं भी खत्म
25 दिसम्बर से 8 जनवरी तक पाठ्यपुस्तक संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए प्रत्येक संदर्भ केन्द्र में सम्पर्क कक्षाएं लगाई गई। विद्यार्थी भी प्रतिदिन इनमें पहुंचे। उन्हें या तो पुरानी किताबों से पढ़ाया गया या पढ़ाया ही नहीं गया। इसके बाद जिन केन्द्रों पर व्याख्याताओं की भर्ती परीक्षा थीं। इस कारण विशेष आदेश जारी कर दूसरे चरण का शिविर 14 से 20 जनवरी तक लगाया गया, लेकिन उस समय तक भी विद्यार्थियों को नई किताबें नहीं मिली।

यह था ओपन स्कूल का उद्देश्य
ओपन स्कूल का लक्ष्य सबके लिए शिक्षा रखा गया है। इसमें बालिकाओं, महिलाओं, ग्रामीण युवाओं, काम करने वाले पुरुषों व महिलाओं जनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति, विकलांग व अन्य सुविधा वंचित लोगों को शिक्षित करना इसकी विशेष प्राथमिकता है।

स्टेट ओपन स्कूल की नई पाठ्यपुस्तकों के लिए वर्कऑर्डर जारी कर दिए है। कुछ पेजों पर त्रुटियां हैं, इन्हें सुधरवाया जा रहा है। इसके बाद पुस्तकें छपाई के लिए जाएंगी। उसके बाद संदर्भ केन्द्रों पर पहुंचेगी।
रामचन्द्र सिंह बगडिय़ा, सचिव, स्टेट ओपन स्कूल

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