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33 साल से नहीं खुले गेट, प्लेटें हुई खराब...

Anil Sharma

Publish: Nov 12, 2019 23:09 PM | Updated: Nov 12, 2019 23:09 PM

Kota

राणा प्रताप सागर बांध : बजट स्वीकृत, जल्द होगा जीर्णोद्धार, १६ नवंबर को होगी वीडियोग्राफी

रावतभाटा. चंबल नदी पर स्थित राणा प्रताप सागर बांध के गेटों को लेकर हो रही लापरवाही किसी भी समय भारी पड़ सकती है। बांध के चार स्लूज गेटों में से गेट संख्या दो में पानी रोकने के लिए लगी लोहे की प्लेट जंग लगने से क्षरित होने लगी है। जिससे पानी रिसने लगा है। अगर ऐसा ही रहा तो क्षतिग्रस्त प्लेट टूट सकती है और देखते ही देखते पानी से लबालब बांध के खाली होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसा हुआ तो बांध से जुड़े राजस्थान के कई जिलों समेत स्थानीय लोगों के लिए पेयजल संकट उत्पन्न हो जाएगा। वहीं परमाणु विद्युत परियोजनाओं, निर्माणधीन परियोजनाओं, भारी पानी संयंत्र, व निर्माणशीन एनएफसी संयंत्र के संचालन को लेकर भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार 33 वर्षों पहले वर्ष 1986 में चारों स्लूज गेटों को खोलने के प्रयास किए गए थे। बांध के गेट में लगी 16 एमएम मोटी व 12 टन वजनी लोहे के प्लेट जंग खाकर बांध की दीवारों से चिपक गई है। इस वजह से गेटों को उठाने के दौरान गेट से जुड़े रस्से टूट गए। सिंचाई विभाग की स्लूज गेट खोलने की मंशा अधूरी रह गई। हाल ही में गांधी सागर बांध से पानी की बम्पर आवक होने पर राणा प्रताप सागर बांध के 17 क्रेश गेट खोलकर 5.97 लाख क्यूसेक पानी निकाला था। फिर भी तेज पानी की आवक होने पर बांध पूर्ण भराव क्षमता 1157.50 फीट से ऊपर 1159.3 तक पहुंच गया। ऐसे में बांध के चार स्लूज गेट खोलकर 23 हजार 6०० क्यूसेक पानी छोड़ा जा सकता था, लेकिन स्लूज गेट जाम होने से ऐसा संभव नहीं हो सका।

वीडियोग्राफी के बाद साफ होगी स्थिति

बांध के स्लूज गेट जंग लगकर जाम हो गए हैं। जिसके चलते इनकी मरम्मत संभव नहीं। स्टॉप लॉक गेट भी पानी के भीतर किसी कारण से अटक रहे हैं, लेकिन स्टॉप लॉक डालकर ही स्लूज गेट काटकर निकाले जाएंगे। बांध के जीर्णोद्धार के लिए विश्व बैंक से अनुमानित 44.8 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। संभवतया 16 नवम्बर से पानी के भीतर सभी गेटों की वीडियोग्राफी होगी। जिसमें स्टॉप लॉक गेट अटकने के करणों का पता चल सकेगा। इसके बाद विभाग समस्या दूर करने का प्रयास करेगा।

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