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Watch: कोटा में बाढ़ से तबाह हुआ स्कूल, कीचड़ में तब्दील हो गईं ढेरों किताबें

Zuber Khan

Publish: Sep 23, 2019 09:00 AM | Updated: Sep 23, 2019 01:28 AM

Kota

Flood in kota: कोटा में बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई। आशियानों के साथ स्कूल भी ताश के पत्तों की तरह ढह गए, किताबें नष्ट हो गई।

कोटा. चम्बल की बाढ़ से कुन्हाड़ी पीर बाबा की मजार स्थित सरकारी स्कूल तहस-नहस हो गया। यहां रखी बच्चों की ढेरों किताबें कीचड़ में तब्दील हो गई हैं। लुग्दी बनी ये किताबें अब किसी काम की नहीं रही। प्रधानाध्यापिका सीमा आजाद ने बताया कि स्कूल में कमरों की कमी थी। इस कारण पोर्टेबल स्कूल बनाया गया था। उसमें बच्चों की कताबें रखी थीं। बाढ़ का पानी स्कूल में घुसने से कुछ भी सामान नहीं बचा पाए। पूरा स्कूल तहस-नहस हो गया। यहां तक कि बच्चों की किताबें भी स्कूल में ही छूट गई। पानी के साथ आए कीचड़ के कारण स्कूल में रखी ढेरों किताबें बह गई। यहां 40 बच्चों की किताबें रखी थी, जो कीचड़ में तब्दील हो गई।

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अब ये बच्चों को नहीं मिल पाएंगी। इसके अलावा स्कूल में रखा पोषाहार भी बह गया। दरवाजे-खिड़कियां टूटकर बह गई। इस स्कूल में 126 बच्चों का नामांकन है। स्कूल का रेकार्ड भी बह गया। कुछ रेकॉर्ड व किताबों को निकालकर सुखाने का प्रयास किया, लेकिन उनमें कीचड़ इतना है कि वे सूखने के बावजूद सही नहीं हो पाएगी। डीईओ द्रोपती मेहर ने बताया कि स्कूल से नुकसान की रिपोर्ट मिल गई है। अब पाठ्यपुस्तक मंडल व अन्य स्कूलों से सम्पर्क कर बचत में रखी पुस्तकों की डिमांड लेकर मंगवाई जाएगी, ताकि बच्चे वापस स्कूल आकर पढ़ाई शुरू कर सके।

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बच्चों में फिर जागी पढऩे-लिखने की उमंग
कोटा. बाढ़ से तबाह हुए कुन्हाड़ी पीर बाबा की मजार प्राथमिक स्कूल के लिए लॉयंस क्लब कोटा साउथ सहायक बना। क्लब की सचिव ने अपने सदस्यों से स्कूल की मदद के लिए एक अपील की और 17 हजार की राशि एकत्रित हो गई। इस राशि से बच्चों के लिए बैग व अन्य स्टेशनरी की सामग्री लोकर बच्चों को बांटी। सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे।

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सचिव डॉ. सुषमा आहूजा ने बताया कि विद्यालय की इमारत पूरी तरह से गिर गई। बच्चों के घर व बैग पाठ्य सामग्री तक नष्ट हो गई। क्लब अध्यक्ष एसके विजय, क्षेत्रीय अध्यक्ष गिरिराज मूंदड़ा, सदस्य वीपी आहूजा, मुकेश, कुसुम गुप्ता, रमेश, यशोदा गोयल समेत अन्य सदस्य शनिवार को स्कूल पहुंचे और बच्चों को बैग, स्टेशनरी, टिफिन, बॉटल व कपड़े बांटे। गौरतलब है कि बाढ़ का पानी स्कूल में घुस गया था। इससे पूरा स्कूल तहस-नहस हो गया। राजस्थान पत्रिका ने 21 सितम्बर के अंक में 'लहरों की भेंट चढ़ा शिक्षा का मंदिर और मीरां की बस्ती Ó शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद स्कूल की मदद के लिए भामाशाह आगे आए।