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कैंसर पीडि़त पत्नी को भर्ती करने के लिए गिड़गिड़ता रहा पति, 12 घंटे ठोकरें खाता रहा बुजुर्ग, नहीं पसीजा डॉक्टरों का दिल

Zuber Khan

Publish: Aug 24, 2019 12:18 PM | Updated: Aug 24, 2019 12:18 PM

Kota

कैंसर पीडि़त पत्नी को अस्पताल में भर्ती करने के लिए पति हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा।

कोटा. अपनी कैंसर पीडि़त पत्नी को रक्त चढ़वाने के लिए पति कमरे दर कमरे भटकता रहा। धरती के भगवान के हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाता रहा।
आंखों को कभी आंसुओं से भिगो देता तो कभी तिरस्कार के शब्द सुन कर वापस पत्नी के पास जाकर बैठ जाता।

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रामपुरा और एमबीएस अस्पताल में एक कैंसर पीडि़त महिला को रक्त चढ़ाने के लिए जगह नहीं दी गई। उसके पति को परेशान करने का मामला सामने आया है। कैंसर पीडि़त महिला को भर्ती करने के लिए पति चिकित्सकों के सामने गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन उसे 12 घंटे बाद भी भर्ती नहीं किया। आखिरकार पत्रिका की दखल के बाद सीनियर डॉक्टर्स तक मामला पहुंचने पर महिला को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। उसके बाद उसके ब्लड चढ़ाया गया।

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यह है मामला
स्टेशन क्षेत्र के रोटेदा रोड पर सिद्धि टाउन निवासी आशा (55) कैंसर से पीडि़त है। जांच में आशा के हीमोग्लोबिन 5.5 ग्राम रह गया। महिला मरीज को पहले जिला रामपुरा अस्पताल में दिखाया गया। वहां से उसे एमबीएस रैफ र किया गया। 22 अगस्त को दोपहर 12 बजे महिला मरीज को एमबीएस में भर्ती किया गया। उसे महिला मेडिकल डी वार्ड में शिफ्ट किया गया। वार्ड में बेड खाली नहीं होने के कारण बेड नम्बर-6 के सामने बैंच पर लेटाकर उसे एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया।

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महिला के पति रामवतार ने बताया कि बेड की परेशानी को देखते हुए रात करीब 12 बजे नर्सिंग स्टाफ ने मरीज को घर ले जाने की सलाह देते हुए सुबह जल्दी आने को कहा। नर्सिंग स्टाफ की सलाह पर मरीज को रात को 1 बजे घर ले गए। दूसरे दिन जब सुबह 8 बजे वापस अस्पताल लेकर पहुंचे तो नर्सिंग स्टाफ ने मरीज को (एब्स्कोंड) फ रार बताते हुए भर्ती करने से इनकार कर दिया। महिला का पति अस्पताल में इधर से उधर चक्कर काटता रहा, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। बाद में नर्सिंग स्टाफ के कुछ लोगों ने दुबारा भर्ती टिकट बनवाने की सलाह दी। सलाह पर अमल करते हुए परिजनों ने दोपहर 12 बजे रजिस्ट्रेशन काउंटर से पर्ची कटवाई और ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया।

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डॉक्टर ने मरीज को ओपीडी में लाने की बात कही, जबकि महिला के पति ने कहा कि मरीज की हालत गंभीर है, ओपीडी में नहीं ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि वार्ड में ही भर्ती कर मरीज को सिर्फ ब्लड नहीं चढ़ाना है। इस बीच महिला मरीज वार्ड में लेटी रही। इसके चलते शाम तक उसके ब्लड नहीं चढ़ा और न उसे चिकित्सकों ने देखकर इलाज किया। बाद में डॉ. निर्मल शर्मा को मामले का पता चला तो उन्होंने गम्भीरता दिखाई और मरीज को वार्ड में भर्ती करवाने में मदद की।

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महिला को भर्ती करना चाहिए था
कल मेरी यूनिट थी। महिला मरीज आशा को वार्ड में भर्ती किया था, लेकिन बेड नहीं मिलने के कारण उसे बैंच पर ही ब्लड चढ़ाया गया। नर्सिंग स्टाफ ने उसे क्यों रवाना किया, यह गलत है। यदि घर भेजा तो दूसरे दिन वापस महिला को भर्ती करना था। दूसरे दिन यूनिट बदल गई। इस कारण दूसरे चिकित्सकों को देखकर भर्ती करना था। क्यों नहीं भर्ती किया, वे ही बता सकते है।
डॉ. सीपी मीणा, एमबीएस अस्पताल

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मरीज को देखे बिना कैसे भर्ती करते
मरीज की कंडीशन देखे बिना कैसे भर्ती किया जाए, कैसे दवा लिखी जाए, जानकारी में आया कि मरीज का पति सुबह भी ओपीडी में जिद करता रहा कि मरीज को भर्ती कर दो। मरीज एक दिन पहले भर्ती था। इसके बारे में न तो इसने ओपीडी में जानकारी दी, ना ही उसके कागज थे। ओपीडी में बैठा डॉक्टर बिना कागज देखे, बिना मरीज को देखे कैसे दवा लिख सकता है। भर्ती करना तो दूर की बात है। बाद में इमरजेंसी में रेजीडेंट डॉक्टर से भी बिना मरीज को देखे भर्ती करने की रट करता रहा। गुरुवार को एक यूनिट ब्लड चढऩे के बाद मरीज को एब्सकोंड कैसे किया गया। किन परिस्थतियों में किया गया। इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
डॉ. निर्मल शर्मा, एमबीएस अस्पताल