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इन्हें रात-दिन डराती रहती हैं 'दरारें'

Mukesh Gaur

Publish: Jan 25, 2020 18:24 PM | Updated: Jan 25, 2020 18:24 PM

Kota

परकोटे पर बने मकानों का मामला : खतरे के बीच जी रहे दर्जनों परिवार

कोटा. गुलाबबाड़ी के छोगा की बावड़ी क्षेत्र मे परकोटे की दीवार पर मकानों में रहने वाले परिवार खतरे के साए में जी रहे हैं। यहां के कई मकानों की दीवारें दरकने लगी हैं। कई मकानों में एक से डेढ़ फीट चौड़ी दरारें हैं। इसके चलते इन लोगों की नींद और चैन गायब हो गए हैं। यह परेशानी आज से नहीं है। यहां के वाशिंदे यह समस्या पिछली बरसात से झेल रहे हैं। परकोटे पर बना मकान चाहे वह एक मंजिल का हो या दो मंजिल का सभी मकानों में ऊपर से नीचे तक दरारे पड़ गई। कई मकानों में दरारें इतनी बड़ी हैं कि मकान के ही दो हिस्से हो गए। दर्जनों मकानों में तो ऐसी कोई दीवार नहीं बची जिसमें दरार न पड़ी हो। दरारें पडऩे से दीवारें, छत की पट्टियों व आरसीसी की छत तक अपने स्थान से आधे फुट तक खिसक गई और कुछ मकान आगे की ओर झुक गए। मकानों की छत व दीवारें नहीं गिरें, इसके लिए लोगों ने बांस बल्लियों के टेके लगा रखे हैं। डर के कारण लोगों ने दूसरी मंजिल पर जाना ही बंद कर दिया। इतना कुछ होने के बाद भी परिवार इन खतरनाक मकानों को छोड़ नहीं रहे। यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यह
समस्या समता भवन के निकट पानी की टंकी के पास से शुरू परकोटे की दीवार पर बने में मकानों में आई है।

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रातों की नींद उड़ी
घनश्याम महावर ने बताया कि पिछले वर्ष तेज बरसात के बाद से ही दरारें पडऩी शुरू हो गई थी। ये अब कुछ इंच से आधे फीट तक की हो गई। सहारे के लिए नीचे बांस-बल्लियों के टेके लगाकर जुगाड़ कर रखा है। ऊपरी मंजिल पर रह रही महावर की बहू हेमलता ने बताया कि दीवारों से पत्थर निकल कर अपने आप नीचे गिर रहे हैं। ऊपरी मंजिल का एक कमरा तो बंद कर दिया है।
परकोटे की दीवार पर ही बने मकान में रह रहे महावीर ने बताया कि इस मकान में 20 लोगों का परिवार रह रहा है। दरार पडऩे से ऊपरी मंजिल का एक कमरा तो अलग हिस्से में बंट गया। कमरे की दीवारों, छत पर लगी पट्टियों में दरारें आ गई। ऊपरी मंजिल वाली सीढिय़ों की दीवार अलग हो गई। कमरों में लगे दरवाजे खुल नहीं रहे या खुले है तो बंद नहीं हो पा रहे। यह दरारें बढ़ती ही जा रही है।
कृष्णा ने बताया कि दो मंजिला मकान में ऐसी कोई दीवार नहीं जिसमें दरारें नहीं पड़ी हो। मकान में ऊपर की ओर जाने वाली सीढिय़ों तथा दूसरी दीवार में भी गैप आ गया। ऊपरी मंजिल के कमरों में भी दरारें पड़ गई। इसके चलते ऊपरी मंजिर पर कोई भी नहीं जाता। यह मकान कभी भी गिर सकता है। मौत तो सिर पर खड़ी है, पूरी जिंदगी तो यहीं पर निकाल दी, अब जाए तो जाएं कहां।
राम स्वरूप ने बताया कि दो मंजिला मकान में बीच के हिस्से में दरारें पड़ गई। दरारें पडऩे से मकान आगे की ओर झुक गया। कमरे की दीवार छत सहित आधे फीट तक खिसक गई। सीढिय़ों के सहारे छत पर बल्लियां लगा रखी है। यह मकान तो कभी भी गिर सकता है के सवाल पर नागर ने कहा कि साहब रात भर नींद नहीं आती, जिदंगी भर की पूंजी तो इस मकान बनाने में लगा दी, अब कहां जाए।

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संतोष बाई ने बताया कि पिछले वर्ष हुई तेज बरसात के बाद से ही मकानों में दरारें पडऩा शुरू हो गई थी। वो यहां दीवार पर ही बने मकान में रहती है। उसने कहा अब तो मकान में सभी कमरों की दीवार में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई। ऐसा एक ही मकान में नहीं परकोटे की दीवार पर बने ज्यादातर मकानों के हालात ऐसे ही हैं। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अब इन मकानों को छोड़कर कैसे जाएं।

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