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घर छूटा लेकिन नहीं भूल पाए परकोटे का वो माहौल .. और फिर नए कोटा में शुरू हुआ गणेशोत्सव

Rajesh Tripathi

Publish: Sep 11, 2019 19:54 PM | Updated: Sep 11, 2019 19:54 PM

Kota

1985 में नए कोटा में भी शुरू हुआ था गणेशोत्सव

 

कोटा. पहले हम लोग टिपटा में रहते थे। भूरिया गणेशजी के सामने मकान था, तब क्षेत्र में गणेश महोत्सव की धूम को देखते थे, फिर अनंत चतुर्दशी आती तो जैसे पूरा क्षेत्र ही भक्तिमय हो जाता था, लेकिन 1985 के आसपास महावीर नगर में आकर बस गए। क्षेत्र का विकास और लोगों की बसावट तब होने ही लगी थी, लेकिन पुराना कोटा छोडऩे के बाद भी वहां का अनंत चतुर्दशी का उत्साह व उल्लास गणेश चतुर्थी आने के साथ ही आंखों के सामने आ जाता था। बस इसी उत्साह व उमंग में क्षेत्र के विपिन जोशी ने 28 बरस पहले 1989 में प्रतिमा की स्थापना करना शुरू कर दिया।

स्थापित की थी महज डेढ़ फीट की प्रतिमा
अनंतचतुर्दशी महोत्सव आयोजन समिति नए कोटा के संस्थापक अध्यक्ष विपिन जोशी बताते हैं कि 1 पिता प्रभु लाल जोशी की प्रेरणा से शुरू में महावीर नगर तृतीय चौराहे पर सीएडी सर्किल से करीब 1 से डेढ़ फीट की प्रतिमा को लेकर आए और चौराहे पर विराजमान किया। अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमा को सिर पर रखकर जुलूस के रूप में रंगबाड़ी ले गए और कुण्ड में विसर्जित कर दिया। महोत्सव के समापन पर छोटे से जुलूस ने बड़ा रूप ले लिया। अब क्षेत्र के युवाओं ने इसे प्रतिष्ठा पूर्ण महोत्सव के रूप में स्थापित करने की ठान ली ।लोगों के उत्साह उमंगों से यह महोत्सव नए कोटा क्षेत्र में अनंत चतुर्दशी की विशाल शोभायात्रा का आधार बन गया।किया सम्पर्क जोड़े लोग उज्साह व उमंग की इस लहर में आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने क्षेत्र की धार्मिक संस्थाओं व संगठनों को जोड़ा। नतीजन 1990 में शोभायात्रा में 4 झांकियां शामिल हुई। अगले ही बरस 1991 में झांकियों की संख्या बढ़कर 11 हो गई। अब इस शोभायात्रा में 50 से अधिक झांकियां व दर्जन भर अखाड़े शामिल होते हैं। विपिन ने बताया कि 28 वर्ष के इस सफर में कुछ मुश्किलें भी आईं लेकिन सब विघ्नहर्ता दूर कर देता है। अभी आयोजन से करीब 500 कार्यकर्ता जुड़े हैं। क्षेत्र के लोगों का भी पूरा सहयोग रहता है। इसी की बदौलत महोत्सव ने शहर में एक नई पहचान बनाई है।

शोभायात्रा पर ही रहा जोर
गणेश चतुर्थी पर स्थापना के बाद हर दिन आरती की जाती है। आयोजन समिति के पदाधिकारी बताते हैं कि महोत्सव मनाने के साथ क्षेत्र में पुराने कोटा की तर्ज पर शोभायात्रा को विशाल रूप बनाना चाहते थे। उन्होने बताया कि बीच में भजन संध्या का आयोजन भी वर्षों तक किया लेकिन मुख्य चौराहा व लोगों की असुविधा को देखते हुए अब कार्यक्रम सीमित रखते है। सिर्फ शोभायात्रा को ही विशाल रूप दे रहे हैं। विपिन बताते हैं कि 3 से 4 लाख लोग शोभायात्रा को देखते हैं। पुराने कोटा की तरह ही यहां का अब माहौल रहता है। अब तो प्रशासन का सहयोग भी मिलता है। एक दौर था जब आयोजन को प्रशासन ने हरी झंडी ही नहीं दी थी, लेकिन बाद में पूर्व मंत्री हरिकुमार औदिच्य के सहयोग व तत्कालिक पुलिस अधीक्षक एन आर के रेड्डी के सहयोग से प्रशासन का सहयोग मिलने लगा।

प्रतिमा का बढ़ा रूप
यहां शुरू में एक से डेढ़ फीट की प्रतिमा की स्थापना की जाती थी, बाद में तीन फट और अब करीब छह फीट की प्रतिमा की स्थापना करते हैं। इस वर्ष भी करीब इतनी ही ऊंचाई की प्रतिमा की स्थापना की गई। खड़े गणेश की प्रतिमा आकर्षक सिंहान पर विराजमान की है।

इस बरस 55 झांकियां
आयोजन समिति की ओर से इस वर्ष अनंत चतुर्दशी के जुलूस में 55 झांकियां, 14 अखाड़े14 भजन मंडलियां व 5 बैण्ड शामिल होंगे। शोभायात्रा महावीर नगर तृतीय चौराहे से ही शुरू होगी।