स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

यूरिया की कमी ने बढ़ाई धरती पुत्रों की चिंता

DILIP VANVANI

Publish: Dec 14, 2019 12:09 PM | Updated: Dec 14, 2019 12:09 PM

Kota

डीएपी खाद की किल्लत झेल रहे किसानों को अब नीम कोटेड यूरिया की चिंता सता रही है। हालात यह है कि कृषि विभाग मांग के मुताबिक किसानों को मात्र 40 प्रतिशत यूरिया ही उपलब्ध करा पाया है, जबकि सबसे ज्यादा जरूरत यूरिया की पिलाई के समय होती है। बुआई का समय तो निकल गया है। पिलाई का समय अभी चल है।

रावतभाटा. कभी अतिवृष्टि के शिकार तो कभी डीएपी खाद की किल्लत झेल रहे किसानों को अब नीम कोटेड यूरिया की चिंता सता रही है। हालात यह है कि कृषि विभाग मांग के मुताबिक किसानों को मात्र 40 प्रतिशत यूरिया ही उपलब्ध करा पाया है, जबकि सबसे ज्यादा जरूरत यूरिया की पिलाई के समय होती है। बुआई का समय तो निकल गया है। पिलाई का समय अभी चल है। इस समय किसानों को नीम कोटेड यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है।

Read more: खूबसूरती को लगा लापरवाही का ग्रहण, उजड़ रहे सब्जबाग
कृषि विभाग की माने तो उपखंड में नीम कोटेड यूरिया की मांग 3 हजार 500 टन है, जबकि कृषि विभाग की ओर से पूर्ति मात्र 1 हजार 350 टन की गई है। अधिकारियों का कहना है कि 2 हजार 150 टन यूरिया उपलब्ध कराने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखकर भेजा है। यह आगे से क्यों नहीं आ रहा है। इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। कई किसान यूरिया चितौडग़ढ़़, भीलवाड़ा व रामगंजमंडी से भी लेकर आ रहे हैं। उपखंड में मध्यप्रदेश सीमा भी लगती है। क्षेत्र के किसान मध्यप्रदेश की सीमा से लगने वाले सिंगोली सहित आसपास के क्षेत्र के प्राइवेट डीलरों से नीम कोटेड यूरिया महंगे दामों पर लेकर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि कई प्राइवेट डीलरों ने इसे स्टॉक करके रखा है। वह किसानों को बाजार से महंगे दामों पर बेच रहे हैं। रावतभाटा में नीम कोटेड यूरिया गुजरात व कोटा के गड़े पान से आता है। एक बैग की कीमत 267 रुपए है। प्रति बैग में 45 किलो निकलता है। उपखंड मेंं प्राइवेट डीलर इसे 300 रुपए प्रति कट्टा बेच रहे हैं, जबकि मध्यप्रदेश में 345 रुपए की कीमत में भी बेचा जा रहा है।

Read more: मध्यप्रदेश सीमावर्ती क्षेत्रों में खाद की कालाबाजारी, मची मारामारी, कतार में खड़ी किशोरी बेहोश
20 से 25 दिन दिन बाद फिर पड़ेेगी जरूरत
किसानों का कहना है कि 60 से 65 किलो नीम कोटेड यूरिया की प्रति हैक्टेयर फसल अंकुरित होने के बाद जरूरत पड़ती है। कई किसान महंगे दामों पर खरीदकर इसकी पूर्ति कर रहे। 20 से 25 दिन बार फसलों की दूसरी पिलाई होगी। इसके बाद नीम कोटेड यूरिया की किसानों को फिर आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं कि वह फिर कहां से लेकर आएंगे। रावतभाटा में क्रय विक्रय सहकारी समिति एक है। 15 ग्राम सेवा सहकारी समितियां हैं। यहां पर नीम कोटेड यूरिया मिलता है। 15 प्राइवेट डीलर भी हैं, जो इसका व्यापार करते हैं।
यह हुई क्षेत्र में बुआई
उपखंड में 21 हजार 543 हैक्टेयर में रबी की फसलों की बुआई हुई है। 10 हजार 510 हैक्टेयर में गेहूं, 1800 में सरसों, 6 हजार 70 हैक्टेयर में चना, 110 में जौ, 60 में अफीम, 10 तारामीरा, 110 लहसून, 8 अलसी, 7 हैक्टेयर में मसूर की बुआई हुई है। 2600 में धनिया, 45 इसबगोल, 32 सब्जियां, 38 प्याज, 12 रजका, 98 बरसी, 9 मैथी, 9 कलोजी व 15 हैक्टेयर में अन्य फसलों की बुआई हुई है।
वर्जन
नीम कोटेड यूरिया की कमी चली है। इसे उपलब्ध कराने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखकर भेजा है। जैसे ही उपलब्ध हो जाएगा किसानों को वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
धनपालसिंह, सहायक कृषि अधिकारी, रावतभाटा

[MORE_ADVERTISE1]