स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

मंत्री जी की शिक्षकों को सीख, ब्लैक बोर्ड हटा कर लैबोरेट्री में पढ़ाए, टेक्निकल यूनिवर्सिटी तकनीकि के साथ स्वरोजगार मुखी शिक्षा पद्दति विकसित करे

Suraksha Rajora

Publish: Aug 19, 2019 19:50 PM | Updated: Aug 19, 2019 19:52 PM

Kota

convocation Rajasthan Technical University तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग ने शिक्षकों को दी सीख

 

 

कोटा. तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग ने कहा कि शिक्षा के मौलिक स्वरुप में परिवर्तन अभी तक नहीं आया। मैं तकनीकी शिक्षा का भविष्य देख रहा हूं, जो विद्यार्थी आज डिग्रियां लेकर जा रहे है। उनका भविष्य क्या है। हमारा फोकस ब्लैक बोर्ड की जगह लेबोरेट्री शिक्षा पर ध्यान देना होगा।

संस्कृत महाविद्यालय में छात्र संघ चुनाव का बहिष्कार, छात्र मांग रहे नए भवन में पढ़ने को जगह

वे सोमवार को यूआईटी ऑडिटोरियम में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के नवें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। मंत्री गर्ग ने कहा कि हमकों देखना पड़ेगा कि देश के विकास में बीटेक किस प्रकार योगदान दे सकते है। चार साल की शिक्षा में क्या कमियां पाई वो बताए, उन्हें दूर करेंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा में सारा करिकुलम थ्योरी पर होना चाहिए।

उन्होंने तकनीकी प्रशासन को कहा कि विद्यार्थियों को सिर्फ तकनीक ज्ञान ही नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों के विकास को जोड़ते हुए सामाजिक विज्ञान, इतिहास, मानव विज्ञान जैसे अन्य पाठ्यक्रम संचालित की जानी चाहिए, ताकि इनमें मानवीय मूल्यों का विकास हो सके। उन्होंने तकनीकी विवि के प्रशासन से कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ रोजगार व स्वरोजगारमुखी शिक्षा पद्धति बनाए।

- शिक्षक होते विद्यार्थियों के हीरों

समारोह में मंत्री ने शिक्षकों को भी सीख दी कि वे विद्यार्थियों के हीरों होते है। वे विद्यार्थी के लिए भविष्य को संवारने का जिम्मा चुनौती के रूप में लें। अभी भी कहीं न कहीं गेप व मिसिंग है। इसे सुधारना होगा।

- खुद का हो ऑडिटोरियम

समारोह में मंत्री ने कहा कि विद्यार्थी पांच साल तक जहां पढ़ाई करता है। उसे डिग्री भी उसी स्थान से मिलनी चाहिए, ताकि उसे गर्व की अनूभुति होती है कि जहां से पढ़ाई की, वहां से डिग्री हासिल की, लेकिन डिग्री दूसरे स्थान से दी जा रही है। ऐसे में तकनीकी विवि का खुद का ऑडिटोरियम व डोम होना चाहिए, जहां खुद कार्यक्रम करवा सके।