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पहला ऐसा स्कूल, बच्चों को नहीं ले जाना पड़ता बैग, टीचर नहीं है फिर भी होती है जमकर पढ़ाई

Chandu Nirmalkar

Publish: Jul 18, 2019 19:47 PM | Updated: Jul 18, 2019 19:49 PM

Kondagaon

Chhattisgarh govt school: छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा स्कूल जहां बच्चे खाली हाथ जाते हैं स्कूल और मजे से पढ़ाई (Education) कर खाली हाथ लौट जाते है घर..

कोंडागांव. आपको शायद यह जानकार आश्चर्य होगा कि, छत्तीसगढ़ में एक ऐसा सरकारी स्कूल (Chhattisgarh govt school) संचालित हो रहा है। जहां पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को स्कूल (Ditital School) आने के लिए अपना कापी-पुस्तक लाने की जरूरत ही नहीं हैं। हम बात कर रहे है, छत्तीसगढ़ के कोंडागांव के सरकारी स्कूल मड़ानार का। जहां बच्चे खाली हाथ स्कूल जाते हैं दिनभर मजे से पढ़ाई कर खाली हाथ वापस घर लौट जाते हैं।

प्रोजेक्टर व मोबाइल के माध्यम से हो रही पढ़ाई
शिक्षा गुणवत्ता पर स्कूल प्रबंधन ने उच्चाधिकारियों से समय-समय पर मार्गदर्शन लेते हुए अपने स्कूल को ही पूरी तरह से डिजीटल कर दिया है। और यही वजह है कि, यहां अब पढ़ाई पुस्तकों के बीच-बीच में बने बारकोड को स्कैन कर प्रोजेक्टर व मोबाईल के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही हैं। इससे बच्चों को समझने व शिक्षकों को समझाने में काफ ी सुविधा मिल रही हैं। यही वजह है कि, इस विद्यालय में अध्यनरत बच्चे अब अपने बस्ते का वजन ही भूलते जा रहे है। दरअसल उन्हें अपने साथ घर से बस्ता लेकर आने की जरूरत ही नहीं होती।

एक शिक्षक जो शिक्षा गुणवत्ता के लिए समर्पित
आपको बता दे कि, इस स्कूल में पिछले तीन सालों से पदस्थ शिक्षक शिवचरण साहू जो पूरी तरह से शिक्षा गुणवत्ता के लिए समर्पित नजर आते है। उन्होंने ही अपने वेतन के पैसे से स्कूल के लिए लैपटॉप, प्रोजेक्टर, प्रिंटर, म्यूजिक सिस्टम सहित अन्य सामान खरीद बच्चों को डिजीटल तकनीक से पढ़ाई करवा रहे हैं।

जो किसी प्राईवेट स्कूलों में पालकों को मोटी रकम खर्च करने के बाद बच्चों को दी जाती हैं। ठीक वैसी ही व्यवस्था शिक्षक साहू अपने इस सरकारी स्कूल में भी करने की ठान ली हैं। यही नहीं वे ग्रीष्मकालीन शिविर भी हर साल लगाते आ रहे है जहां बच्चों को खेल के साथ ही विभिन्न कलाओं के बारे में तकनीकी जानकारी देते हुए बच्चों को सालभर एगेंज रखते हैं। ऐसा नहीं कि इनकी समर क्लास में बच्चे न आते हो, बल्कि 30 दिनों तक तो गर्मी में भी बच्चे बड़ी संख्या में स्कूल पहुंचकर अपने मास्टर ट्रेनरों का इंतजार करते रहते हैं।

 

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