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कैसे बनेगी विश्व विरासत हमारी ऐतिहासिक धरोहरें

Kali Charan kumar

Publish: Jul 20, 2019 12:29 PM | Updated: Jul 20, 2019 12:29 PM

Kishangarh

किशनगढ़ में है प्राचीन और ऐतिहासिक भवन, चारदीवारी और बुर्जे उपेक्षित
400 वर्ष से अधिक प्राचीन होने के बाद भी नहीं ध्यान
सरकारी संरक्षण की है जरूरत

मदनगंज-किशनगढ़. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की ओर से जयपुर शहर के चारदीवारी क्षेत्र को विश्व विरासत की सूची में शामिल किया गया। जयपुर 292 वर्ष प्राचीन है वहीं किशनगढ़ 400 वर्ष से अधिक प्राचीन है। इसके बावजूद किशनगढ़ की धरोहरें उपेक्षित अवस्था में है। इन धरोहरों के सरकारी संरक्षण की आवश्यकता है। ऐसे में प्रश्न यह है कि आखिर हमारी धरोहरें विश्व विरासत कैसे बनेगी।
किशनगढ़ की स्थापना तत्कालीन शासक किशनसिंह ने वर्ष 1611 में बसंत पंचमी के दिन की थी। गुंदोलाव झील किनारे बसाया गए किशनगढ़ में प्राचीन निर्माण शैली, दरवाजे, कुएं-तालाब-बावडिय़ां मौजूद है। वहीं जयपुर की स्थापना सवाई जयसिंह द्वितीय ने 18 नवंबर 1727 को की थी। इस कारण किशनगढ़ जयपुर से 100 वर्ष से अधिक पुराना है।
काफी पुराने भवन
किशनगढ़ के किले सहित नवग्रह मंदिर, सदर बाजार, हवेलियां, मंदिर, काचरिया पीठ, चौबुर्जा, सुखनिधान जी का मंदिर सहित बहुत से स्थान पुराना क्षेत्र में स्थित है। यहां के पुराने शहर और नया शहर क्षेत्र को परकोटा से घेरा हुआ था फिर भी यहां कई गेट अभी भी बचे हुए है। वर्तमान में यहां 6 पुराने दरवाजे बचे हुए है। इनके संरक्षण की आवश्यकता है। इसके साथ ही निकटवर्ती उदयपुर का बंधा और पीतांबर की गाल भी काफी पुराने है।
पीठाचार्य की राय
किशनगढ़ में बहुत सी प्राचीन धरोहरें है। इस 400 वर्ष से अधिक पुराने शहर को संरक्षित किए जाने की जरूरत है। यहां की हवेलियां और निर्माण शैली भी काफी पुरानी है। भगवान कृष्ण की भक्ति का प्रभाव होने के कारण भी यहां काफी मंदिर है। यहां का परकोटा गायब हो चुका है। अभी भी बहुत सी विरासत है जिसे सहेजा जा सकता है। यहां के कई गेट अभी भी सुरक्षित अवस्था में है जिनका संरक्षण किया जा सकता है। किशनगढ़ के पुराने निर्माण क्षेत्र को विश्व धरोहर घोषित करवाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
-जयकृष्ण देवाचार्य, काचरिया पीठाचार्य।
इनका कहना है-
किशनगढ़ जयपुर से अधिक पुराना है। यहां की निर्माण शैली के साथ ही चित्रशैली भी काफी प्रसिद्ध रही है। 400 वर्ष पुराने किशनगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है। किशनगढ़ के पुराने शहर को विश्व धरोहर घोषित करवाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
-शहजाद अली
किशनगढ़ 400 वर्ष से अधिक पुराना है। यहां का किला, पुराना शहर और नया शहर में अभी भी पुरानेे भवन, मंदिर, हवेलियां, कुएं-बावडिय़ां आदि है। कई पुराने निर्माण संरक्षित नहीं किए जाने के कारण ध्वस्त हो गए है। इन धरोहरों को संरक्षित कर विश्व विरासत घोषित करवाए जाने के प्रयास होने चाहिए।
-शंकर सिंह राठौड़