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किसान दंपती का देसी जुगाड़, मक्का फसल को इल्लियों के प्रकोप से बचाया

Ajay Kumar Paliwal

Publish: Sep 10, 2019 18:47 PM | Updated: Sep 10, 2019 18:57 PM

Khargone

शेविंग स्प्रे से भुट्टों पर कीटनाशक का छिड़काव

बमनाला (खरगोन). पहले सूखे की मार से परेशान किसान अब आफत की बारिश के चलते खराब हो रही फसल को बचाने के लिए अलग-अलग प्रयोग कर रहे हैं। ऐसा ही एक प्रयोग बमनाला के किसान दंपती ने किया। जिससे अपनी फसल भी बचा सके और उस पर होने वाला खर्चा भी कम आ सके।


स्थानीय कृषक लखनसिंह पिता शेरसिंह मंडलोई एवं उनकी पत्नी कुसुम द्वारा दो एकड़ खेत में बोई गई मक्का की फसल में इल्ली का प्रकोप अधिक होने पर कीटनाशक छिड़काव के लिए किया गया। किसान दंपती द्वारा स्प्रेगन (फव्व्वारे) द्वारा अपने 2 एकड़ खेत में बोई गई मक्का की फसल पर कीटनाशक का छिड़काव किया गया। आमतौर पर स्प्रेगन का उपयोग सेविंग दुकान पर दाढ़ी बनाने या फिर शोरूम व दुकानों पर शीशे पर जमा धूल को साफ करने के लिए किया जाता है। वहीं किसान दंपती ने अपनी सुझबूझ से देसी जुगाड़ अपनाकर फसल को इल्लियों से खाने से बचा लिया।

सिर से बड़ी फसल में दवा डालने की चुनौती
किसान लखन मंडलोई ने बताया कि हमेशा पीठ पर बांधकर पंप से फसलों पर कीटनाशक के लिए दवाई का प्रयोग छिड़काव के रूप में किया जाता है। लेकिन सिर से बड़ी हो चुकी मक्का फसल में पौधों के बीच 20 लीटर के पंप को लेकर चलना मुश्किल था। इसलिए स्प्रेगन से खड़ी फसल में दवाई का छिड़काव किया गया। जिसका फायदा मक्का के पौधे के बीच से निकलने वाली परेशानी से भी बचा जा सका एवं तैयार हो चुकी फसल को भी टूटने से बचाया जा सका।

3000 की जगह छह सौ रुपए में काम
मक्का पर इल्ली के प्रकोप से बचने के लिए की गई कीटनाशक दवाई यदि 100 प्रतिशत लगती है तो सिर्फ 25 प्रतिशत मात्रा में ही दवा का उपयोग हुआ। किसान ने बताया कि दो एकड़ खेत में कीटनाशक छिड़काव पर लगभग 3 हजार लागत आ रही थी। नए तरीके से 600 रुपए की दवाई में ही काम हो गया। समय भी उतना ही लगा एवं इस प्रयोग से सीधा छिड़काव मक्का के भुट्टे पर ही हुआ । यदि पंप से किया जाता तो पूरे पौधे पर दवाई का छिड़काव करना पड़ता। जिससे दवाई की मात्रा अधिक लगती व असर भी कम होता। अपने इस अनूठे प्रयोग से किसान दंपती खुश है। वही क्षेत्र में चर्चा का विषय है।

अधिक बारिश के कारण जलभराव खेतों में हो गया है जिससे कपास की फसल पीली पड़ गई है। वही मक्का में भी इल्ली का प्रकोप है।
एनआर वर्मा, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी भीकनगांव