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75 किमी का सफर बचाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण

Manish Arora

Publish: Jan 19, 2020 12:23 PM | Updated: Jan 19, 2020 12:23 PM

Khandwa

-पुनासा से बागली जाने के लिए खतरनाक तरीके से पार कर रहे नदी
-नावों पर इंसानों के साथ वाहनों को भी लादकर ले जाया जा रहा पार
-नाव में कोई सुरक्षा के साधन भी मौजूद नहीं, कभी भी हो सकता हादसा

खंडवा. जिले की पुनासा तहसील से देवास जिले की बागली तहसील तक जाने के लिए ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव से सफर कर रहे हैं। पुनासा से बागली के बीच सड़क मार्ग से करीब 100 किमी की दूरी है, जबकि नाव नर्मदा पार करने पर ये दूरी महज 20 से 25 किमी तक रह जाती है। 75 किमी का सफर बचाने के लिए ग्रामीण बिना किसी सुरक्षा साधनों के नाव से पार जा रहे है। नावों में लोगों के साथ बाइकों को भी लाद के ले जाया जा रहा है, जो कि सफर को और भी खतरनाक बना रहा है।
खंडवा जिले की संसदीय सीट में शामिल देवास जिले की बागली तहसील से पुनासा तहसील के 30 गांवों का जुड़ाव है। नर्मद पार खेती, व्यवसाय सहित रिश्तेदारी भी होने से रोजाना 100 से 150 लोग बागली-पुनासा के बीच आना जाना करते है। सड़क मार्ग की लंबी दूरी से बचने के लिए नाव से नदी पार करना ही एक मात्र साधन ग्रामीणों के पास उपलब्ध है। नावों में 15 से 20 सवारी बैठाने के साथ 8 से 10 दो-पहिया वाहन भी लाद लिए जाते हैं। अधिक वजन की नाव में सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट, हवा से भरे ट्यूब भी नहीं होने से हादसे के दौरान बड़ी जन-धन हानि की संभावना भी बनी रहती है। यहीं नहीं नदी के दोनों ओर नाव के लिए कोई व्यवस्थित घाट भी नहीं बना हुआ है। जिससे खतरा दोगुना हो रहा है।
5 से 10 रुपए इंसान के, 20 रुपए बाइक के
नर्मदा नदी किनारे बागली तहसील के धाराजी, नयापुरा, गोवाड़ी, नरसिंहपुर, पाटपूरा, पोटला, बियादड़, कंडिया, बावड़ीखेड़ा, प्रेमगढ़, रतनपुर सहित अन्य गावों के लिए पुनासा से बड़वाह, सनावद होकर जाना पड़ता है। ये सफर करीब 100 से 150 किमी का होता है। नाव से धाराजी पहुंचने पर वहां से बाइक पर सवार होकर इन गांवों के लिए अधिकतम दूरी 25 किमी रह जाती है। बाइक से सफर लंबा होने के साथ पेट्रोल भी अधिक लगता है। जबकि नाव से पार जाने में 5 से 10 रुपए एक व्यक्ति के और बाइक के 20 रुपए लगते है। समय, सफर और रुपए बचाने के लिए ग्रामीण जान को भी जोखिम में डाल रहे है।
कनेरी नदी पर पुल निर्माण से होगी आसानी
पुनासा से धाराजी जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग के तौर पर एक कच्चा रास्ता भी है। पुनासा से सतवास, जयंती माता जंगल होते हुए कनेरी नदी को पार कर रतनपुर, धाराजी पहुंचा जा सकता है। जंगल का रास्ता कच्चा होने और रास्ते में कनेरी नदी पर पुलिया आदि नहीं होने से ग्रामीण इस रास्ते का कम ही उपयोग करते है। गर्मियों में कनेरी नदी सूखने के बाद यहां से आना जाना शुरू हो जाता है। पानी रहने पर ये मार्ग बंद हो जाता है। यदि कनेरी नदी पर पुलिया बन जाए तो ये मार्ग पुनासा से बागली को जोड़ सकता है।

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