स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

Tajmahal बनने के पहले यहां ठहरती थी मुमताज

deepak deewan

Publish: Oct 21, 2019 20:20 PM | Updated: Oct 21, 2019 20:20 PM

Khandwa

यहां ठहरती थी मुमताज

खंडवा
दुनिया के सात आश्चर्यों में शुमार ताजमहल की खूबसूरती सभी का मन मोह लेती है। मुगल बादशाह शाहजहां ने मुमताज महल की याद में इसका निर्माण करवाया था। यहां मुमताज दफन है, इस बात से तो हर कोई वाकिफ है पर इससे पहले मुमताज कहां रहती थी इसके बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते। बुरहान में आयोजित सिटी वॉक फेस्टिवल में यह इतिहास बताया गया।
मुमताज से ताज तक के सफर में बच्चों को शाही किले से लेकर आहूखाना की भी जानकारी दी गई। ग्रुप लीडर शहजादा आसीफ खान ने मुमताज से ताज तक के सफर को सिटी वॉक में प्रस्तुत किया। शुरुआत शाही किले से हुई। यहां पर आसीफ खान ने बताया कि जिस तरह वर्तमान में घर और ऑफिस होते हैं, उसी प्रकार शहजादा के समय भी शाही किले में घर और ऑफिस थे। यहां मुमताज के ठहरने से लेकर उनके हमाम खाने तक की जानकारी दी। इसके बाद दीवाने आम और दीवाने खास बताया जहां दीवाने आम में क्षेत्रीय लोगों की सुनवाईहुआ करती थीं, दीवाने खास में बाहर से आने वाले राजा महाराज और विदेशी लोगों से बातचीत हुआ करती थी। किला परिसर में मौजूद लोंगी मस्जिद के बारे में बताया। खान ने कहा कि यह लोंग के आकार की मस्जिद है, इसलिए इसे लोंगी मस्जिद कहा जाता है।

शिकारगाह था आहूखाना
जैनाबाद के पास स्थित आहूखाना जहां पर मुमाताज को दफनाया गया था। यह आहूखाना पहले शिकारगाह था। शहजादा आसीफने बताया कि आहू याने हिरण खाना मतलब घर। यहां बाद में गार्डन भी बनाया गया। इसमें गुलाब के फूल लगाए गए थे। इसमें पानी महलगुराड़ा से आता था। 14 एकड़ में यह आहूखाना फैला हुआ है।