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सोयाबीन के भावांतर का भुगतान ना होने से ये कर रहे किसान...

dharmendra diwan

Publish: Oct 16, 2019 16:14 PM | Updated: Oct 16, 2019 16:14 PM

Khandwa

69 में से 25 केंद्र पर ही 14 दिन में 345 किसानों के हुए पंजीयन, सर्वर पोर्टल और किसानों की रूचि कम होने से संख्या में गिरावट, पिछले वर्ष 61500 ने कराए थे पंजीयन

 

खंडवा। फाइल फोटो
खंडवा. खरीफ सीजन में 2019 के तहत ई-पोर्टल पर 3 अक्टूबर से मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द, कपास के पंजीयन चल रहे हैं। पंजीयन के लिए 69 केंद्रों की व्यवस्था की है। लेकिन 14 दिन में केवल 25 केंद्रों पर ही पंजीयन शुरू हुए है। 14 दिन में मात्र 345 किसानों ने ही पंजीयन कराए है। पिछले वर्ष 2018 में जिले में 61536 किसानों ने पंजीयन कराए थे। इस बार अब पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले एक फीसदी भी नहीं पहुंच पाई है। पंजीयन कराने के अंतिम 8 दिन किसानों के पास शेष है। ऐसे में पिछले वर्ष की तुलना में पंजीयन की संख्या आधी भी पहुंचना मुश्किल है। पंजीयन कम होने के पीछे दो मुख्य कारण सामने आ रहे। पहला ई-पोर्टल का नहीं खुलना और दूसरा कारण प्रदेश सरकार के प्रति किसानों की नाराजगी है।

समर्थन मूल्य राशि के भुगतान का असमंजस
भाकिसं के जिला प्रवक्ता जय पटेल ने बताया पिछले वर्ष 2018 में बेचे सोयाबीन, मक्का की भावांतर/ समर्थन मूल्य का भुगतान को वर्तमान प्रदेश सरकार ने नहीं किया है। कई किसानों का असमंजस है कि प्रदेश में सरकार को वहीं है। क्या पता इस वर्ष भी भावांतर/ प्रोत्साहन राशि का भुगतान होगा या नहीं। जिससे पंजीयन संख्या में कमी है।

मॉनीटिंग का अभाव व सर्वर की समस्या

जिले में पंजीयन के लिए सेवा सहकारी सोयायटी के 69 केंद्र निर्धारित किए गए है। इसके अलावा एमपी किसान ऐप, ई-उपार्जन मोबाइल एप, पब्लिक डोमेन ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। 3 अक्टूबर से अभी तक 25 केंद्रों पर ही पंजीयन हुए हैं। 49 सहकारी सोयायटी केंद्रों पर पंजीयन शुरू ही नहीं हुए। शुरू के 5-6 दिनों तक पोर्टल खुलने में काफी दिक्कतें आई। 15 अक्टूबर मंगलवार को भी सर्वर के कारण पोर्टल खुलने में बार-बार समस्याएं आती रही।