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नकद भुगतान बंद कर आरटीजीएस लागू हो, नहीं तो एक से नीलामी बंद

dharmendra diwan

Publish: Aug 21, 2019 11:22 AM | Updated: Aug 21, 2019 11:22 AM

Khandwa

खंडवा. केंद्र सरकार बैंक से एक करोड़ रुपए की नकद राशि निकालने पर दो फीसदी टीडीएस राशि काटने का नियम 1 सितंबर से लागू कर रही है। इससे मंडी व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। इसे लेकर केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ व्यापारियों की नाराजगी सामने आ रही है।

खंडवा. केंद्र सरकार बैंक से एक करोड़ रुपए की नकद राशि निकालने पर दो फीसदी टीडीएस राशि काटने का नियम 1 सितंबर से लागू कर रही है। इससे मंडी व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। इसे लेकर केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ व्यापारियों की नाराजगी सामने आ रही है। व्यापारी राज्य सरकार की ओर से किसानों को दो लाख रुपए तक के नकद भुगतान को बंद कर, आरटीजीएस/ एनईएफटी भुगतान प्रणाली को 1 सितंबर से शुरू करने की मांग पर उतर आए हैं। मंगलवार को व्यापारियों ने पुरानी अनाज मंडी पहुंच मंडी सचिव के नाम पत्र सौंपा। चेतावनी दी कि 1 सितंबर से आरटीजीएस/एनईएफटी प्रणाली लागू नहीं हुई तो मंडी में किसानों के अनाज की खरीद बंद कर देंगे। वहीं 40 दिन बाद दोबारा 16 अगस्त से ई-अनुज्ञा जारी होने लगी, लेकिन तकनीकी समस्याओं का हवाला देकर व्यापारी ई-अनुज्ञा का भी विरोध कर रहे हैं।

नगद भुगतान से व्यापारियों को नुकसान

मंडी व्यापारी संघ के प्रशांत अग्रवाल ने बताया किसानों को 2 लाख रुपए तक का नकद भुगतान करते हैं। मंडी में छोटे से करोड़ों रुपए तक का व्यापार करने वाले हैं। सीजन में प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा का अनाज खरीद किसानों को नकद भुगतान करते हैं। ऐसे में व्यापारी सालाना 30 करोड़ तक कै श भुगतान करते हैं। 2 प्रतिशत टीडीएस लागू होगा तो बैंक से रुपए नकद निकासी पर लाखों रुपए टैक्स देना होगा।
इसलिए हम आरटीजीएस या एनईएफटी प्रणाली की मांग कर रहे हैं।
केंद्र और राज्य के नियमों में उलझे व्यापारी

किसानों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने कुछ साल से 2 लाख रुपए का नकद भुगतान करने का नियम लागू किया। व्यापारियों को किसानों को दो लाख रुपए तक नकद भुगतान करते हैं। केंद्र सरकार आयकर अधिनियम के अंतर्गत एक करोड़ रुपए की नकद निकासी पर दो प्रतिशत टीडीएस टैक्स लेगी। 1 सितंबर से यह नियम लागू होगा। राज्य सरकार के किसानों को नकद भुगतान और केंद्र सरकार के 2 प्रतिशत टीडीएस टैक्स लेने के नियमों में व्यापारी उलझ गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि 2 प्रतिशत टीडीएस लिया जाएगा तो हम किसानों को नकद के बजाय आरटीजीएस या एनईएफटी से भुगतान करेंगे।

ई-अनुज्ञा प्रणाली में खामियां नहीं हुई दूर

ई-अनुज्ञा प्रणाली को राज्य सरकार ने 1 जुलाई से शुरू किया था। तकनीकी कारणों व व्यापारियों के विरोध के बाद 5 जुलाई से इस व्यवस्था को कुछ दिन के लिए स्थगित कर दिया। अब 16 अगस्त से दोबारा व्यवस्था का शुरू कर दिया लेकिन इसमें तकनीकी खामियां बरकार है। जो पूर्व में लागू करने के समय थी। जिससे व्यापारियों को परेशानी हो रही। माल खरीदने के बाद प्रत्येक किसान के भुगतान पत्रक की इंट्री करना पड़ रहा। इंट्री करने के चक्कर में अधिक समय लगा रहा। साथ ही छोटे व्यापारियों के पास कम्प्यूटर, इंटरनेट, अनुभवी ऑपरेटर की कमी है। जिस वजह से उन्हें ई-अनुज्ञा के लिए ज्यादा परेशानी उठाना पड़ रहा है।

ई-अनुज्ञा में यह दिक्कतें
-क्रय-विक्रय के बाद ई-अनुज्ञा व्यापारी स्वयं निकाल रहे तो उन्हें गाड़ी को गेट पर बुलाने का क्या औचित्य है।
-दैनिक भुगतान पत्रक जमा नहीं करने पर क्रय किए उपज को मंडी से बाहर नहीं ले जाने दिया जा रहा।
-भुगतान पत्रक पर किसानों के मोबाइल नंबर नहीं लिखेंगे।

कमियां कर रहे दूर

ई-अनुज्ञा सॉफ्टवेयर में कमियां सामने आने पर उसे दूर किया जा रहा है। बाहर से आने वाली गाडिय़ों को ही मंडी गेट पर बुलाया जाता है। जो व्यापारी ई-अनुज्ञा जारी कर रहे उनकी गाडिय़ों को मंडी गेट पर नहीं बुला रहे। व्यापारियों ने आरजीटीएस प्रणाली की मांग की है। स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं हो सकता। - दिलीप नागर, सचिव, कृषि उपज मंडी, खंडवा