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अध्यक्ष ने कहा- मेरी नहीं सुन रहे, पार्षदों की क्या बिसात, 50 मिनट में स्थगित हुआ दस महीने बाद हो रहा सम्मेलन

Amit Jaiswal

Publish: Aug 14, 2019 12:21 PM | Updated: Aug 14, 2019 12:21 PM

Khandwa

नगर निगम...न बजट पर हुई बात, न सूटकेस खुला

खंडवा. नगर निगम का दस महीने बाद हुआ परिषद सम्मेलन मंगलवार को हंगामे की भेंट चढ़ गया। वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट पर चर्चा छिडऩे से पहले यहां बहस छिड़ी और ये इतनी बढ़ी कि सम्मेलन को आगामी तारीख तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

बड़ी बात यह रही कि यहां भाजपा समर्थित अध्यक्ष आसंदी पर बैठे सभापति रामगोपाल शर्मा के समर्थन में नेता प्रतिपक्ष अहमद पटेल सहित कांग्रेसी पार्षदों ने जमीन पर बैठकर निगम की अफसरशाही के खिलाफ आक्रोश जताया। ऐसा कमोबेश कम ही देखने को मिलता है। उधर, महापौर सुभाष कोठारी और निगमायुक्त हिमांशु सिंह के खिलाफ गुस्सा भी नजर आया। एमआइसी सदस्य वेदप्रकाश शर्मा सहित भाजपा समर्थित पार्षदों ने खूब खरी-खोटी सुनाई। बजट सहित 15 सूत्रीय एजेंडे को लेकर सम्मेलन बुलाया था। दोपहर 12.29 बजे शुरू हुए सम्मेलन में जब पिछले सम्मेलन के कार्यों की पुष्टि की जा रही थी तो पार्षदों ने विकास कार्यों में देरी, सम्मेलन के हर बार महीनों बाद होने और नगर निगम के अफसर-कर्मचारियों द्वारा सुनवाई नहीं किए जाने के मुद्दों को लेकर बहस छेड़ दी। बता दें कि पिछला सम्मेलन 3 अक्टूबर 2018 को हुआ था।

बड़ी बात: भाजपा के अध्यक्ष के पक्ष में कांग्रेसी पार्षद जमीन पर बैठ गए
हंगामा: 2 महीने में सम्मेलन क्यों नहीं होता, निर्णय लेते हैं तो पालन क्यों नहीं करते
आक्रोश: 19 पार्षदों ने प्रश्न पूछे हैं लेकिन विभागों ने जवाब नहीं दिए, कार्रवाई हो
पीड़ा: अब तो हमें ये खुद से पूछना पड़ता है कि हम पार्षद हैं भी या नहीं? ये स्थिति कर दी
आत्म-सम्मान पर ठेस: अध्यक्ष ने कहा- मेरे दो बार लिखे पत्र का जवाब नहीं, कर्मचारी पर कार्रवाई करो
आरोप: 5वां साल है और पांचवां सम्मेलन हो रहा, बजट पास न करवाना हो तो सम्मेलन ही न करवाओ

आसंदी से अध्यक्ष की पीड़ा यूं आई सामने
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे सभापति रामगोपाल शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर जानकारी के लिए मैंने दो पत्र लिखे लेकिन 3 महीनों में इनका जवाब तक स्थापना से मुझे नहीं मिला। जब मेरी ऐसी स्थिति है तो अन्य पार्षदों का क्या होता होगा? पार्षदों को लेकर तो उम्मीद करना ही बेकार है। अध्यक्ष ने सम्मेलन में ही निगमायुक्त सिंह से इसका जवाब भी मांगा। जब निगमायुक्त ने जांच कर कार्रवाई की बात कही तो कांग्रेस के पार्षद अध्यक्ष के समर्थन में आ गए और जमीन पर बैठ कर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद अध्यक्ष ने सम्मेलन को आगामी तारीख तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

इन पार्षदों ने ये कहा-
- सोमनाथ काले ने कहा- हम पार्षद ज्यादातर एक-दूसरे को नहीं पहचानते, क्योंकि इतने महीनों में मिल पाते हैं। पुरुष तो काम करा लेते हैं लेकिन महिलाओं ने पहचान खो दी। क्या इन्होंने पार्षद बनकर गलती कर दी?
- मेहमूद खान ने परिषद सम्मेलन हर 2 महीने में बुलाए जाने के संबंध में निगम एक्ट देखने की बात अफसरों से कही। साथ ही कहा कि पिछली बैठक में तय हुआ था कि अब हर बार समय पर सम्मेलन आहूत करेंगे।
- प्रमिला ऐतालकर ने कहा- हम पार्षद हैं या नहीं? मैंने तो आते से ही ये पूछा? मैं पहले की परिषद में भी थी, लेकिन इस बार बहुत अंतर है। नल खोलने वाला कर्मचारी तक हमारी नहीं सुनता है।
- नेता प्रतिपक्ष अहमद पटेल ने मुद्दा उठाते हुए कहा- अब तक परिषद की चार बैठकें हुईं हैं, लेकिन एक की भी प्रोसेडिंग नहीं दी। शहर में कोई विकास कार्य नहीं हुए। गड्ढों में तब्दील हो गया है।
- शारदा आह्वाड़ बोलीं- निगम के अफसर-कर्मचारियों के बीच हमारी कोई सुनवाई नहीं होती है। महापौर-आयुक्त को फोन लगाओ, तब जाकर उनमें से कुछ काम हो पाते हैं।

टाइम लाइन
11 बजे का समय था निर्धारित
12.28 बजे महापौर सूटकेस लेकर आए
12.29 बजे अध्यक्ष आए, राष्ट्रगान हुआ
05 मिनट के लिए श्रद्धांजलि के बाद स्थगित
12.41 बजे फिर शुरू होते ही हंगामा बरपा
1.19 बजे सम्मेलन के स्थगित होने की घोषणा

ये दो मुद्दे...अध्यक्ष-एमआइसी सदस्य ही गुस्से में...
1. जनता ने हमें चुनकर भेजा, हम चोर नहीं
एमआइसी सदस्य वेदप्रकाश शर्मा ने कहा- मैंने प्रश्न पूछे हैं, विभागों ने जवाब नहीं दिए। दोषी कौन? फाइल पढ़ेंगे फिर सदन में चर्चा करेंगे। तुम कुछ भी बाचो, ऐसा नहीं चलेगा। जनता ने हमें चुनकर भिजवाया है, हम चोर नहीं हैं। पिछली परिषद में जो भी निर्णय लिए गए, उनका क्या हुआ? इसका लेखा-जोखा दें। अध्यक्ष महोदय, आप सम्मेलन स्थगित करने का निर्णय नहीं ले सकते तो हम सदन छोड़कर चले जाएं क्या?

2. बजट पास न कराना हो तो क्या बैठक भी नहीं
अध्यक्ष ने टिप्पणी करते हुए कहा- निगम एक्ट के तहत प्रत्येक दो माह में बैठक होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। पूर्व परिषद में महापौर भी थे, सदन में ये कहते रहे कि दो माह में बैठक होगी। ऐसा नहीं हुआ। मैं मानता हूं कि ये ठीक नहीं है। पार्षद अपनी बात कहां रखेगा? अगर बजट पास नहीं कराना हो तो आप बैठक कराना भी उचित नहीं समझोगे? इसमें भी जो निर्णय लिए जाते हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।