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मां का पता नहीं, गंभीर अवस्था में अस्पताल छोड़ रफूचक्कर हुई वृध्दा तो नवजात को इन्होंने दिया सहारा

deepak deewan

Publish: Sep 15, 2019 15:39 PM | Updated: Sep 15, 2019 15:39 PM

Khandwa

नवजात बेटियों का सहारा बने समाजसेवी

खंडवा। एक ओर जहां समाज में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देकर जागृत किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर सामाजिक कुरीतियों के चलते अभी भी कुछ लोग लाडलियों को अभिशाप समझ रहे हैं। ऐसे में उनके जन्म के बाद उन्हें अबोध अवस्था में ही भगवान भरोसे छोड़़कर जा रहे हैं। लेकिन कहते हैं कि जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा होता है, फिल्मी गाने की इन पंक्तियों को खंडवा के एक मसीहा द्वारा सार्थक किया जा रहा है। लावारिस हालात में मिली कई बेटियों को समाजसेवी सुनील जैन द्वारा अस्पताल पहुंचाकर उनका उचित उपचार कर उन्हें नया जीवनदान देने के साथ ही जीने का सहारा दिलाया है।

ऐसा ही एक मामला खण्डवा में भी सामने आया है। यहां बीमार हालात में नवजात बच्ची को एक वृद्ध महिला अस्पताल में भर्ती करा कर रफूचक्कर हो गई। महिला अस्पताल के शिशु गहन चिकित्सा केन्द्र के प्रभारी डा. कृष्णा वास्कले ने पहले बच्ची का इलाज करना जरूरी समझ कर उसका इलाज शुरू कर दिया। समाजसेवी सुनील जैन को अज्ञात नवजात बच्ची की जैसे ही सूचना प्राप्त हुई तो वे अस्पताल पहुंचे और बच्ची को देखकर डा. वास्कले से चर्चा की। उन्होंने कहा कि खण्डवा के शासकीय महिला अस्पताल के शिशु गहन चिकित्सा में नवजात बच्ची को एक वृध्द महिला ने भर्ती करवाया और जब मैंनेे माँ को लाने का कहा तब से वृध्द महिला लौटी नहीं। जब 24 घण्टे बीतने के बाद भी वृध्द महिला नहीं लौटी तो चाइल्ड लाइन को इस बच्ची की सूचना दी गई। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कृष्णा वास्कले ने बताया कि नवजात बच्ची की हालत गम्भीर है, बच्ची 1 किलो 150 ग्राम अतिकम वजनी है। बच्ची को गहन चिकित्सा में रखा गया है जहाँ इसका इलाज चल रहा है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि कई योजनाएं बेटियों के लिए सरकारे चला रही हंै उसके बाद भी बेटियों को नहीं अपनाने के मामले आज भी सामने आते हैं। बेटियों को बोझ व अभिशाप समझकर कई निर्दयी मां नौ महीने अपने कोख में रखकर पैदाकर उसे भगवान भरोसे मरने के लिए छोड़ जाती है। विगत वर्षो में खंडवा में दर्जनों ऐसी घटनाएं हो चुकी है जिनको निर्दयी माताओं ने नाले-नालियों, छाडिय़ों, जमीन में गाड़ देने के मामले भी सामने आए हैं। हालांकि ऐसे बच्चे-बच्चियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और डाक्टरों के साथ चिकित्सा केन्द्र की समस्त नर्सो द्वारा विशेष ध्यान रखकर उन्हें नया जीवन दिया गया। वे बच्चे-बच्चियां जिन्हें उनकी माताओं ने मरने के लिए छोड़ा था वे आज करोड़पति परिवारों में पल कर बड़े हो रहे हैं।