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जाने कहां नहीं जाती एम्बुलेंस, कीचड़ भरे रास्ता पार कर स्कूल पहुंचते है विद्यार्थी........

dharmendra diwan

Publish: Aug 21, 2019 11:45 AM | Updated: Aug 21, 2019 11:45 AM

Khandwa

खंडवा. यह है खालवा ब्लॉक के गोलखेड़ा पंचायत से ग्राम इमलीढ़ाना का पहुंचमार्ग। गोलखेड़ा से इमलीढ़ाना का यह मार्ग 2 किमी का है। यह पूरा मार्ग वर्तमान में कीचड़ व दलदल में तब्दील हो चुका है।

खंडवा. यह है खालवा ब्लॉक के गोलखेड़ा पंचायत से ग्राम इमलीढ़ाना का पहुंचमार्ग। गोलखेड़ा से इमलीढ़ाना का यह मार्ग 2 किमी का है। यह पूरा मार्ग वर्तमान में कीचड़ व दलदल में तब्दील हो चुका है। इमलीढ़ाना गांव में केवल प्राध्यमिक शाला है।
माध्यमिक व हाईस्कूल कक्षाओं में पढऩे के लिए विद्यार्थियों को गोलखेड़ा आना पड़ता है। वर्तमान में विद्यार्थी पैदल दो किमी के कीचड़ भरे मार्ग से होकर स्कूल पहुंच रहे है। यह समस्या केवल इस साल की नहीं है। हर साल बारिश के सीजन में विद्यार्थी इसी तरह की परेशानियां उठाते है। इतना ही नहीं इमलीढ़ाना के ग्रामीणों को रोशनी, खालवा पहुंचने के लिए गोलखेड़ा से होकर जाने का एक मात्र व मुख्य रास्ता है।

 

कई साल से कच्चा है मार्ग
इमलीढ़ाना गांव गोलखेड़ा पंचायत के अंतर्गत आता है। गोलखेड़ा से इमलीढ़ाना तक दो किमी का कच्चा मार्ग 15 से ज्यादा साल से ऐसा ही है। यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है, पर अनदेखी के कारण दुर्दशा का शिकार हो चली है। सरपंच, सचिव व सीईओ को भी शिकायत कर चुके है। कई सरपंच बनकर चले गए। लेकिन अनदेखी की वजह से सड़क का पक्का निर्माण नहीं हो सका। आज भी हमारे गांव के बच्चें, युवा और बुर्जुगों को कीचड़ का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया सड़क के अलावा गांव में मूलभूत सुविधाएं व शासकीय योजनाओं का भी लाभ भी ठीक तरह से नहीं मिलता है।

नहीं पहुंच पाती एंबुलेंस

जिससे इन गांव के 500 से ज्यादा आदिवासी/ग्रामीण महिला-पुरुषों को कीचड़ से लड़कर पार करना होता है। ग्रामीणों ने बताया की बरसात होते ही ग्रामीणों के लिए यह समस्या बढ़ जाती है। बारिश के दो-तीन महीने में अगर कोई बीमार हो जाएं तो मरीज को लेकर एम्बुलेंस तक गांव नहीं पहुंचती। ग्रामीण व परिजन मरीज को गोलखेड़ा तक लेकर जाते है। जिसके बाद एम्बुलेंस गोलखेड़ा से मरीज को अस्पताल पहुंचाती है।