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मप्र विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक से दादाजी मंदिर को बाहर करने की मांग

Manish Arora

Publish: Dec 31, 2019 12:19 PM | Updated: Dec 31, 2019 12:19 PM

Khandwa

-मंदिर ट्रस्ट और दादाजी भक्तों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
-कहा मंदिर की मर्यादा हो रही भंग, भक्तों की भावना आहत

खंडवा. मप्र विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक 2019 में दादाजी मंदिर को शामिल किए जाने का विरोध तेज होने लगा है। सोमवार को विधेयक से दादाजी मंदिर को बाहर करने की मांग करते हुए मंदिर ट्रस्ट और दादाजी भक्तों ने मप्र के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर हेमलता साोलंकी और दीपाश्री गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। मंदिर ट्रस्ट ने बताया कि इस विधेयक से दादाजी मंदिर की मर्यादाएं भंग हो रही है। साथ ही दादाजी भक्तों की भावनाएं भी इससे आहत हुई है।
मंदिर ट्रस्ट ने बताया कि दादाजी मंदिर किसी शासकीय या दान की जमीन पर नहीं बना है। न ही अंग्रेज सरकार या मप्र सरकार से आर्थिक सहयोग, दान या अनुदान मंदिर के लिए लिया गया और न ही श्री धूनीवाला आश्रम पब्लिक ट्रस्ट ने लिया है। दादाजी आश्रम केवल दादाजी महाराज के अनुयायियों का प्रधान गुरुद्वारा है। छोटे दादाजी महाराज ने 1932 में मुख्य द्वार पर बोर्ड भी लगवाया है जिस पर स्पष्ट लिखा है कि श्री दादाजी को न मानने वाले यहां न आएं। विधेयक में जिस समिति के गठन के प्रावधान किए गए है, वो छोटे दादाजी महाराज की आश्रम स्थापना और मूल भावना व इच्छा के विपरीत है। दादाजी आश्रम के संचालन के लिए गठित कोई भी समिति श्री दादाजी को मानने वाले अनुयायियों व भक्तों के मध्य ही गठित होना चाहिए। अन्य किसी व्यक्तियों का याहं कोई स्थान नहीं है।
ट्रस्ट ने मांग की है कि उक्त विधेयक पर पुनर्विचार कर मप्र शासन दादाजी आश्रम की मर्यादाओं और मूल भावना के विपरीत पारित विधेयक और उसमें श्री दादाजी मंदिर ट्रस्ट को वापस लिया जाए। साथ ही दादाजी के नाम पर अब तक जिन लोगों ने संपत्तियां एकत्रित की है, उसे भी दादाजी आश्रम व्यवस्थापन के लिए विधिवत रूप से गठित श्री धूनीवाला आश्रम पब्लिक ट्रस्ट खंडवा में समाहित किया जाए। ज्ञापन के दौरान मुकेश नागोरी, हेमंत मंडलोई, महेंद्र अग्रवाल, आनंद चौधरी, विजय लाड़, धर्मेंद्र गंगराड़े सहित दादाजी भक्त व सेवक शामिल थे।

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