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बहन की सहेली से दुष्कर्म करने वाले आरोपी भाई को दस वर्ष की कैद

Jitendra Tiwari

Publish: Sep 14, 2019 07:01 AM | Updated: Sep 13, 2019 23:56 PM

Khandwa

नर्मदानगर थाना क्षेत्र का मामला, डेढ साल पुराने प्रकरण में आया फैसला

खंडवा. बहन की सहेली से परिचय कर दुष्कर्म करने वाले आरोपी भाई को अदालत ने शुक्रवार को सजा सुनाई है। प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश किरण सिंह की कोर्ट में हुई। मीडिया सेल प्रभारी एडीपीओ जाहिद खान ने बताया नर्मदानगर निवासी 16 वर्षीय छात्रा कक्षा 10वीं की पढ़ाई कर रही थी। वह रोजाना शाम 5 से 7 बजे तक अपनी सहेली के साथ कोचिंग क्लास जाती थी। इसी दौरान सहेली बोली कि मेरे मामा का बेटा अनिल गौहर तुमसे प्यार करता है और मिलना चाहता है। लेकिन पीडि़ता उसे नहीं जानती थी। सहेली ने उसके ममेरे भाई से पहचान कराई। दोस्ती करने से इनकार कर दिया तो आरोपी कोचिंग क्लास जाते समय रास्ते में पीछा करने लगा। वह घर तक आता था और रास्ते में प्रपोज करता था। इसी बीच 31 दिसंबर 2017 को पीडि़ता कोचिंग से बाहर आई तो उसकी सहेली मिली। उसने कहा मेरा भाई तुमसे मिलना चाहता है। एक बार मिलने के लिए उसने दबाव बनाया। सहेली की बात मानकर वह मिलने के लिए चली गई। वह सुपर मार्केट के पीछे बनी टंकी के पास मिले। वहां अंधेरा था तो सहेली बोली मैं यहीं खड़ी हूं तुम मिलकर आओ। पीडि़ता आरोपी के पास पहुंची तो उसने पकड़ लिया और जबरदस्ती दुष्कर्म किया। घटनाक्रम से वह घबरा गई। घर आई। रात को पेट दर्द हुआ तो परिजन को अपनी आपबीती बताई। इस पर सुबह परिजन ने पीडि़ता के साथ नर्मदानगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। इसी प्रकरण में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने आरोपी अनिल गौहर (20) निवासी सांई मंदिर के पास नर्मदानगर को दस वर्ष के सश्रम कारावास और तीन हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी एडीपीओ चंद्रशेखर हुक्मलवार ने की।

डायरी लिखने और तकलीफ देने वाली बातों को सांझा करने से होता है तनाव कम

खंडवा. दुनिया में जितनी आत्महत्याएं होती हैं उसमें से 17 फीसदी भारत में होती है। शहर की अपेक्षा ग्रामों में ज्यादा लोग आत्महत्या करते हैं। इसका कारण केवल तनाव और उससे उत्पन्न अवसाद है। विश्व हर छठवीं महिला और आठवां पुरुष अवसाद का शिकार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार भारत में 1.35 लाख लोग आत्महत्या का शिकार होते हैं। आत्महत्या का विचार नकारात्मक विचारों से आता है। इसलिए सकारात्मक सोचे और हर काम और हर घटना को सकारात्मक ढंग से ले। डायरी लिखने से भी अवसाद से बच सकते हैं और किसी बात को लेकर गलत विचार किए बगैर सांझा करने से भी तनाव और आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाने से बचा जा सकता है। यह बातें शुक्रवार को आत्महत्या निषेध सप्ताह के तहत शासकीय शिक्षा महाविद्यालय में आयोजित जागरुकता कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर गणेश कानडे ने कहीं। कार्यक्रम में प्राचार्य तनुजा जोशी ने कहा खंडवा सहित खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर के शिक्षक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए हैं। ताकि वह अपने जिलों में जाकर लोगों को आत्महत्या और तनाव अवसाद से मुक्त कराने में मदद कर सकें।

कष्ट देने वाले को क्षमा करें
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों को जीवन का लेखा-जोखा विधि के माध्यम से चार सवाल दिए गए। जीवन में आपकी मदद किसने की? आपने किसकी मदद की? किस-किस ने आपकों कष्ट दिया? और आपने किसको कष्ट दिया? इसके बाद दस मिनट अल्पविराम का अभ्यास किया गया। मंथन करने के बाद शिक्षकों ने अपने जीवन की मदद और कष्ट संबंधी कहानियों का सांझा की और मदद करने वालों को धन्यवाद दिया। वहीं कष्ट देने वालों से क्षमा मांगी। इस मानसिक तनाव खत्म होता है। इस दौरान डॉक्टर रश्मि दूधे, आनंदम सहयोगी उमाशंकर उपाध्याय, ज्योति राठौर, डॉ. उमेश कुमार अग्रवाल, नारायण फरकले आदि उपस्थित थे।