स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

इस साल 12 दिसंबर के बाद नहीं बजेगी शहनाई

dharmendra diwan

Publish: Dec 09, 2019 12:35 PM | Updated: Dec 09, 2019 12:35 PM

Khandwa

मलमास माह में देवअर्चन और आराधना के साथ दान-पुण्य का रहेगा महत्व

खंडवा. 12 दिसंबर वर्ष 2019 का अंतिम विवाह मुहूर्त है। इसके बाद शादियां नहीं होगी। 33 दिन तक विवाह की शहनाई नहीं सुनाई देगी। 15 दिसंबर से मलमास शुरू हो रहा है। मलमास को पुरुषोत्तम मास नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो मलमास खरमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, दुकानों का प्रवेश शुभारंभ व अन्य शुभ काम नहीं होंगे। एक माह तक शुभ कार्य का इंतजार करना पड़ेगा। 15 जनवरी से शुभ कार्य पुन: शुरू होंगे।

[MORE_ADVERTISE1]

मलमास में जप-तप तीर्थ यात्रा, कथा का बड़ा महत्व है। मलमास में हर दिन भागवत कथा सुनने से अभय फल की प्राप्ति होती है। यह दान पुण्य के लिए एक श्रेष्ठ माना गया है। पंडित अंकित मार्कण्डेय ने बताया कि 15 दिसंबर रविवार को खरमास में सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेगा और मकर संक्राति तक इसी स्थिति में रहता है। साथ ही गुरु का तारा अस्त होगा। गुरु के तारे के अस्तस्वरूप होने के कारण समस्त मांगलिक एवं शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। 9 जनवरी को गुरु का तारा उदित होगा। मलमास समाप्त होने के बाद शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। शास्त्रों में सभी शुभ कार्यों के लिए गुरु का शुद्ध होना आवश्यक है। विवाह के लिए वर के सूर्य का बल और वधू के लिए वृहस्पति का बल मिलना जरूरी है। वर्ष 2020 में विवाह का सबसे पहला मुहूर्त 15 जनवरी है।

[MORE_ADVERTISE2]

वर्ष 2020 जनवरी, फरवरी और मार्च में विवाह के मुहूर्त

जनवरी: 15,16,17,18,19,20,21,22, 25,26,27,28,29,30,31
फरवरी: 1,3,4,5,9,10,11,12,13,14, 15,16,17,18,20,21,25,26,27,28
मार्च: 10 ,11 12,13.

[MORE_ADVERTISE3]

मलमास के दौरान क्या करें और क्या नहीं

यह ना करें: विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत, गृहप्रवेश, वास्तुपूजन, देव-देवी प्रतिष्ठा आदि मांगलिक कर्म प्रारंभ होंगे।
यह करें: सभी तरह के धार्मिक अनुष्ठान सूर्य देव की उपासना साथ ही विष्णु जी की पूजा तथा धार्मिक स्थानों पर स्नान दान करना चाहिए। पीपल के वृक्ष की पूजा तथा आदित्य हदय स्त्रोत और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।