स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

शुक्र और गुरु दोनों होंगे अस्त, ब्रह्मांड में होने वाली अनोखी घटना से सभी राशियों पर पड़ेगा असर

Faiz Mubarak

Publish: Sep 29, 2018 17:04 PM | Updated: Sep 29, 2018 17:04 PM

Khajuraho

शुक्र और गुरु दोनों होंगे अस्त, ब्रह्मांड में होने वाली अनोखी घटना से सभी राशियों पर पड़ेगा असर

खजुराहोः आने वाले दिनो में ब्रह्मांड में एक अजीब खगोलीय घटना घटने जा रही है। यह अनोखी अकाशीय घटना के समय एक-एक कर शुक्र और गुरु दोनों ही अस्त हो जाएंगे।इस खगोलीय घटना को मध्य प्रदेश से भी विज्ञानिक उपकरणों के माध्््यम से देखा जा सकेगा। इस घटना के चलते दानवों के दो गुरुओं के अस्त हो जाने का बड़ा असर धरती पर पड़ेगा। इस आकाशीय घटना होने के समय एक खास बात यह होगी कि, जैसे ही इस दोनो गृहों का अस्त होगा उससे कुछ ही देर बाद विष्णु आदि देवताओं का जागरण हो जाएगा। जैसे ही विष्णु इस चराचर का कारोबार शिव संभालेंगे, वैसे ही शुक्र और गुरु का अस्त होना बेकार हो दाएगा। यानि उसका प्रभाव धर्ती पर पड़ना बंद हो जाएगा। ज्योतिषाचार्य श्याम किशोर शर्मा के अनुसार, अश्विन शुक्ल पक्ष में 16 अक्तूबर को शुक्र अस्त हो रहे हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष में 10 नवंबर को गुरु भी पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएंगे। इन दोनों का अस्त होना आकाशीय विरलता को जन्म देता है। ऐसा होने पर अनेक प्रतिगामी शक्तियां ज्योतिष की दृष्टि से उदित हो जाती है। सुखद यह है कि 19 नवंबर को चार महीने से पाताल गए भगवान विष्णु का जागरण होने जा रहा है।

इस दिन होगा यह खास

इस दिन देवोत्थान एकादशी है और तुलसी विवाह का मांगलिक पर्व है। संतों का चातुर्मास भी इसी दिन समाप्त होगा। एकादशी आते ही विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर चार महीनों से लगा अंकुश भी खत्म हो जाएगा।सात दिसंबर को गुरु पूर्व में अस्त हो जाएंगे, लेकिन शुक्र जागरण इस साल नहीं होगा। ज्योतिष श्याम किशोर शर्मा के अनुसार, इस घटना का सभी राशियों बुरा प्रभाव पड़ सकता है। विष्णु जागरण के चलते शुक्र के अस्त होने का प्रभाव नहीं पड़ेगा। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार देवताओं के गुरु बृहस्पति हैं और राक्षसों के गुरु शुक्राचार्य हैं।

ग्रहीय समन्वय उत्पन्न करती है इन दोनों की उपस्थिति

आकाश में इन दोनों की उपस्थिति ग्रहीय समन्वय की स्थिति उत्पन्न करती है। दोनों गुरुओं के रहते आकाश की बाधाएं स्वत मिटती रहती हैं। यदि देव जागरण न होता तो यह स्थिति धरती पर भारी पड़ती। ज्योतिषाचार्य पंडित हरिदेव जोशी के अनुसार ग्रहों का मनुष्य के जीवन पर भारी प्रभाव पड़ता है। कुछ प्रभाव राशियों के अनुसार होता है तो कुछ समग्रता को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि विष्णु के जागरण के बाद सभी प्रकार की बाधाएं पूरी तौर पर खत्म हो जाती हैं। राजा बलि को दिया वचन निभाने आषाढ़ शुक्ल पक्ष में भगवान विष्णु पाताल गए थे और धरती पर शिव का साम्राज्य हो गया था। अब फिर संपूर्ण सत्ता विष्णु के हाथ में आ जाएगी।