स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

जानिए क्या है खजुराहो की नृत्य करती हुई सदियों पुरानी रहस्यमयी मूर्तियों का राज, पहली बार यहां देखें

Astha Awasthi

Publish: Dec 06, 2017 13:57 PM | Updated: Dec 06, 2017 13:57 PM

Khajuraho

ऐतिहासिक विरासतों में से एक है खजुराहो...

खजुराहो। भारत एक विशाल देश है जहां पर अलग-अलग तरह की संस्कृतियां हैं। वैसे ही भारत देश में एक जगह है जिसका नाम खजुराहो है। हिन्दू और जैन धर्म के मंदिरों का सबसे बड़ा समूह, खजुराहो में स्मारकों का समूह, दुनिया के सबसे खूबसूरत सबसे प्रसिद्द और ऐतिहासिक विरासतों में से एक है। ये मुख्य तौर पर अपनी वास्तु विशेषज्ञता, बारीक नक्काशियों और कामुक मूर्तियों के लिए जाना जाता है। बता दें कि यह रचना यूनेस्को द्वारा वैश्विक धरोहर की सूचि में भी शामिल है। हालांकि भारत में कई ऐसे और मंदिर भी हैं जहां कामुक मूर्तियों का चित्रण किया गया है, पर इन मंदिरों का खजुराहो के मंदिरों से कोई तुलना ही नहीं है। खजुराहो में एक अलग ही आकर्षण के साथ चित्रित की गई ये मूर्तियां अपने में एक सबसे अलग रचना है। आप जब भी मध्य प्रदेश की यात्रा में जाएं तो इनको देखना न भूलें।

 khajuraho temple

पूरी विश्व में रहस्य बनी हुई हैं नृत्य करती हुई ये मूर्तियां

जानकारी के लिए बता दें कि खजुराहो में पहले 85 मंदिर थे लेकिन अब 22 ही बचे हैं। इन मंदिरों का निर्माण 950 ई.से 1050 ई.के बीच किया गया था। मंदिरों में बनी कामुक मूर्तियों को केवल बाहरी दीवारों पर ही बनाया गया है। अपनी कामुक, सम्भोगरत और नग्न मूर्तियों के कारण ये विश्व प्रसिद्ध है। हर साल यहां पर लाखों सैलानी घूमने के लिए आते हैं। मंदिरों में बनाई गई कामुक मूर्तियों का निर्माण इतनी बेतरी से किया गया है जिनको देखने के बाद भी किसी के मन में बुरे ख्यालात नहीं आते हैं। मूर्तियों में इतनी खूबसूरती है कि ये लोगों को ध्यान खींच लेती हैं। यहां पर घूमने आने वाले सैलानियों के मन में कई बार ये ख्याल आता है कि इन मूर्तियों को क्यों बनाया गया है। इस बात का उत्तर अलग-अलग विश्लेषकों के अनुसार अलग-अलग है। सबने इस बारे में अपनी अलग-अलग राय दी है। मुख्य रूप से चार मान्यताएं हैं, जो सही मानी जाती हैं।

 khajuraho temple

पहली मान्यता

वहीं दूसरी ओर कुछ विश्लेषक ये भी मानते हैं कि प्राचीन काल में लोगों के सेक्स की शिक्षा देने की दृष्टि से भी इनका निर्माण किया गया है। ऐसा भी मानना है कि इन कामुक आकृतियों को देखने के बाद लोगों को संभोग करने की सही शिक्षा मिलेगी। ऐसा इसलिए भी किया गया क्योंकि प्राचीन काल में मंदिर ही एक ऐसा स्थान था, जहां लगभग सभी लोग जाते थे। इसीलिए संभोग की सही शिक्षा देने के लिए मंदिरों को ही उपयुक्त स्थान माना जाता था।

 khajuraho temple

दूसरी मान्यता

मंदिरो में कामुक मूर्तियों के बनाये जाने के पीछे कुछ विश्लेषकों का यह मानना है कि प्राचीन काल में राजा-महाराजा भोग-विलासिता में अधिक लिप्त रहते थे। वे काफी उत्तेजित रहते थे। यही कारण है कि खजुराहो मंदिर के बाहर नग्न एवं संभोग की मुद्रा में विभिन्न मूर्तियां बनाई गई हैं। ये मूर्तियां बहुत ही सुंदरता के साथ बनाई गई हैं।

 khajuraho temple

तीसरी मान्यता

वहीं कुछ और विश्लेषकों का मानना है कि मरने के बाद मोक्ष पाने के लिए हर इंसान को चार रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है- धर्म, अर्थ, योग और काम। इसी दृष्टि से मंदिर के बाहर नग्न मूर्तियां लगाई गई हैं। क्योंकि यही काम है और इसके बाद सिर्फ और सिर्फ भगवान का शरण ही मिलता है। इसी कारण इसे देखने के बाद भगवान के शरण में जाने की कल्पना की गई।

 khajuraho temple

चौथी मान्यता

मंदिरों में बनी इन कामुक मूर्तियों के पीछे हिंदू धर्म की रक्षा की बात बताई गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि जब खजुराहो के मंदिरों का निर्माण हुआ, तब बौद्ध धर्म का प्रसार काफी तेजी के साथ हो रहा था। चंदेल शासकों ने हिंदू धर्म के अस्तित्व को बचाने का प्रयास किया और इसके लिए उन्होंने इसी मार्ग का सहारा लिया। उनके अनुसार प्राचीन समय में ऐसा माना जाता था कि सेक्स की तरफ हर कोई खिंचा चला आता है। इसीलिए यदि मंदिर के बाहर नग्न एवं संभोग की मुद्रा में मूर्तियां लगाई जाएंगी, तो लोग इसे देखने मंदिर आएंगे। फिर अंदर भगवान का दर्शन करने जाएंगे। इससे हिंदू धर्म को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए भी इन मूर्तियों को लोग बहुत मानते हैं।