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3 विभागों की खींचतान में 16 माह से फंसा 1600 बच्चों का भोजन

Dharmendra Pandey

Publish: Oct 21, 2019 11:15 AM | Updated: Oct 21, 2019 11:15 AM

Katni

राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के अंतर्गत दर्ज बच्चों को जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण स्कूलों में नहीं मिल रहा मध्यान्ह भोजन

 

कटनी. जिले में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना अंतर्गत संचालित स्कूलों में दर्ज बच्चों को मध्यान्ह भोजन 16 माह से नहीं मिल रहा है। 1600 से अधिक बच्चों का मध्यान्ह भोजन तीन विभागों की खींचतान में फंसा है। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते बच्चों को स्कूल में मिलने वाले भोजन के लिए तरसना पड़ा रहा है। इधर, मध्यान्ह भोजन नहीं मिलने को लेकर राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना, जिला पंचायत व जिला शिक्षा केंद्र के अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा पल्ला झाड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जो छात्र किसी कारण वस से स्कूल नहीं जा पा रहे हो। ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। इसके लिए जिले में साल 2005 में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के तहत स्कूलों का संचालन हुआ। 2015 तक स्कूलें नियमिति रूप से संचालित भी हुई। फिर एक साल के लिए बंद हो गई। संचालन को लेकर जिम्मेदारों द्वारा लापरवाही बरती गई। साल 2017 में जिले में दोबारा स्कूलों का संचालन शुरू हुआ।

सत्यापन के दौरान सरकारी व इंडस स्कूल में दर्ज मिले थे बच्चे
इंडस स्कूलों के बच्चों को मध्यान्ह भोजन देने के लिए जिला पंचायत ने बच्चों का सत्यापन कराया। इसमें अधिकांश ऐसे बच्चे मिले जो सरकारी स्कूल में दर्ज होने के साथ ही इंडस स्कूल में भी दर्ज पाए गए। इसके बाद जिला पंचायत ने इंडस परियोजना के जिला प्रमुख से जनपद सीइओ, बीआरसी से सत्यापित सूची व स्कूलों में भोजन कौन बनाएगा। समूह का नाम व सरकारी स्कूल की बजाय इंडस स्कूल में कितने बच्चे आते हैं, सहित दूसरी जानकारियां मांगी गई। जिला पंचायत के अधिकारियों की मानें तो 16 माह से अधिक का समय बीत गया है और अब तक इंडस द्वारा सूची उपलब्ध नहीं जा रही है। इधर, इंडस की जिला प्रमुख जिला पंचायत, जिला शिक्षा केंद्र पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगा रही हैं।

जिलेभर में हैं 36 स्कूलें
जिले में वर्तमान समय में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के तहत 36 स्कूलें संचालित हो रही हैं। इस स्कूलों में घुमक्कड़, श्रमिक, शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए दो साल तक रखा जाता है। इसके बाद उन बच्चों का सरकारी स्कूल में दाखिला करना होता था।

-मध्यान्ह भोजन क्यों नहीं मिल रहा है। इसके बारे में मध्यान्ह भोजन प्रभारी से पता लगाया जाएगा। जनपद सीइओ और बीआरसी क्यों सहयोग नहीं कर रहे हैं, इसके बारे में भी जानकारी ली जाएगी। इंडस परियोजना प्रमुख द्वारा मध्यान्ह भोजन बंद है, इसके बारे में जानकारी भी नहीं दी गई।
जगदीश चंद्र गोमे, जिला पंचायत सीइओ।


-जनपद सीइओ और बीआरसी सहयोग नहीं कर रहे हैं। सूची में हस्ताक्षर नहीं कर रहे जिसके चलते बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं मिल पा रहा है।
रूपल तिवारी, परियोजना निदेशक, इंडस कटनी।


-बीआरसी द्वारा सूची क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा रही। इसके बारे में पता लगवाता हूं। इंडस के बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं मिल रहा है। इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।
बीबी दुबे, प्रभारी डीपीसी।