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पांच साल में निकायों पर किया अनाप शनाप खर्च, अब दूध, पानी अलग

Devkumar Singodiya

Publish: Dec 23, 2019 17:28 PM | Updated: Dec 23, 2019 17:36 PM

Karnal

प्रदेश की नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं में भारी अनियमितताओं की शिकायतों के चलते अनिल विज ने सभी नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं से पिछले पांच वर्ष के दौरान मिली ग्रांट का पूरा ब्यौरा मांग लिया है।

चंडीगढ़. स्थानीय निकाय विभाग की कार्यप्रणाली को नया रूप देने में जुटे गृहमंत्री अनिल विज ने प्रदेश की सभी निकायों से वित्तीय स्टेट्स रिपोर्ट मांग ली है। यही नहीं आम लोगों की समस्याओं के समाधान का नियमित रिव्यू करने के लिए भी अनिल विज ने सैंट्रलाइज फाइल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। अब निकायों में आनी वाली शिकायतों को कंप्यूटरीकृत कर उनका रिकार्ड तैयार किया जाएगा।
स्थानीय निकाय व गृहमंत्री अनिल विज ने हाल ही में करनाल नगर निगम कार्यालय में छापा मारकर भारी अनियमितताएं पकड़ी थी। खुद उनके गृह क्षेत्र अंबाला में भी कई अनियमितताएं मिली हैं। इस मामले में करीब आधा दर्जन कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। प्रदेश की नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं में भारी अनियमितताओं की शिकायतों के चलते अनिल विज ने सभी नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं से पिछले पांच वर्ष के दौरान मिली ग्रांट का पूरा ब्यौरा मांग लिया है। जिसमें पूछा गया है कि अनुदान राशि किस कार्य के लिए मिली है और उसका कितना इस्तेमाल किया गया है।


करोड़ों रुपए लगने के बावजूद प्रोजेक्ट अधर में


विभिन्न करों के रूप में निकायों के उपभोक्ताओं की तरफ करोड़ों रुपए फंसे हुए हैं। दूसरी तरफ संसाधनों की कमी से स्थानीय निकायों के दर्जनों प्रोजेक्ट अधर में लटके हुए हैं। वित्तीय संकट से जूझ रहे स्थानीय निकाय सब्सिडी तक जारी नहीं कर पा रहे, जिससे पात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सिर पर छत के लिए इंतजार लंबा खिंचता जा रहा है। इसके बाद विज ने सभी शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति की पड़ताल का निर्णय लेते हुए ग्राउंड रिपोर्ट तलब कर ली।समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर ही सभी शहरों के विकास का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।


शुरू होगा सैंट्रलाइज फाइल मॉनिटरिंग सिस्टम

विज ने नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं में सैंट्रलाइज फाइल एवं लैटर मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला निकाय मंत्री ने अपने पास आ रही शिकायतों के आधार पर लिया है। उन्हें जानकारी मिली थी कि निकायों में आए दिन लोग शिकायतें लेकर आते हैं उनका समाधान तो दूर उन्हें अक्सर रद्दी की टोकरी में रख दिया जाता है।



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