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हरियाणा विधानसभा चुनाव : दिग्गजों के सामने गढ़ बचाने की चुनौती

Chandra Prakash sain

Publish: Oct 15, 2019 17:48 PM | Updated: Oct 15, 2019 17:48 PM

Karnal

Haryana: हुड्डा, बिश्नोई, अभय, सुरजेवाला, सैनी, दुष्यंत बहा रहे हैं पसीना, अपने क्षेत्र के साथ-साथ दूसरों में भी है प्रचार की जिम्मेदारी

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों के सामने इस बार अपना गढ़ बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। बदले हुए राजनीतिक हालातों तथा मतदाताओं की चुप्पी के बीच कोई भी नेता अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। जिसके चलते राजनीतिक दलों के दिग्गजों को न केवल अपने विधानसभा क्षेत्रों में समय लगाना पड़ रहा है बल्कि पार्टी के मुख्य स्टार प्रचारक होने के नाते प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी प्रचार करना पड़ा रहा है।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने पारंपरिक विधानसभा क्षेत्र गढ़ी-सांपला-किलोई से चुनाव मैदान में हैं। पांच साल की जद्दोजहद के बाद हाईकमान ने हुड्डा के कहने पर अशोक तंवर को हटाया है। इस चुनाव में हुड्डा अपने करीब 60 समर्थकों को टिकट दिलवाने में कामयाब हुए हैं। दूसरी तरफ भाजपा ने उनके क्षेत्र में भले ही पूर्व इनेलो नेता सतीश नांदल को चुनाव मैदान में उतारा हो लेकिन समूची भाजपा लीडरशिप हुड्डा की घेराबंदी कर रही है। ऐसे में हुड्डा के लिए जहां अपने क्षेत्र में समय देना जरूरी है वहीं अपने 60 समर्थकों का मनोबल बढ़ाना भी जरूरी है।

कमोबेश कुछ ऐसी ही स्थिति पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल के बेटे कुलदीप की है। कुलदीप बिश्नोई अपने पुश्तैनी विधानसभा क्षेत्र आदमपुर से चुनाव मैदान में है। विपरीत हालातों में भी भजनलाल परिवार इस क्षेत्र से चुनाव जीतता रहा है। लेकिन इस बार भाजपा ने उनके मुकाबले में टिक-टॉक स्टार सोनाली फौगाट को उतार दिया है। फौगाट के समर्थन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रैली को संबोधित कर चुके हैं। लेकिन कुलदीप को पड़ोसी विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार की जिम्मेदारी के चलते वह अपने इलाके में घिरे हुए हैं।

कांग्रेस के स्टार प्रचारक एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला भले ही खुद को सेफ जोन में मानकर चल रहे हैं लेकिन अपना गढ़ कैथल बचाने में उन्हें भी पसीना बहाना पड़ रहा है। रणदीप सुरजेवाला हालही में जींद उपचुनाव हार चुके हैं। जींद उपचुनाव की परिस्थितियों के बीच कैथल में उनका खासा विरोध हुआ था। हालांकि सुरजेवाला ने डैमेज कंट्रोल कर लिया है लेकिन उन्हें भी अपना गढ़ बचाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
चुनाव से पहले आए राजनीतिक सर्वेक्षणों ने इनेलो की राह को मुश्किल बना रखा है। इनेलो की पूरी राजनीतिक इस समय केवल ऐलनाबाद सीट पर सिमट गई है, जहां से अभय चौटाला चुनाव मैदान में हैं। अभय चौटाला के हाथों में पार्टी की कमान भी है। ऐसे में अभय को अन्य सीटों में भी प्रचार को समय देना पड़ रहा है। दूसरा भाजपा भी उनकी ऐलनाबाद में घेराबंदी कर रही है। ऐसे में अभय के लिए अपना गढ़ बचाना प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है।

अमित शाह की रैलियां रद्द


भाजपा से अलग होकर लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का गठन करने वाले राजकुमार सैनी की पार्टी ने सभी 90 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं। सैनी ने अपने पारंपरिक विधानासभा क्षेत्र नारायणगढ़ से अपने भतीजे गुलशन सैनी पिंकू को चुनाव मैदान में उतारा है जबकि खुद जाटलैंड का गढ़ कहे जाने वाले गोहाना से ताल ठोक रहे हैं। सैनी ने दोनों सीटों पर अपनी पूरी ताकत झौंक रखी है। उनके सामने दलितों व पिछड़ों के क्षेत्र गोहाना में उपस्थिति दर्ज करवाने और खुद का गढ़ बचाने की बड़ी चुनौती है।
इनेलो से अलग होकर जननायक जनता पार्टी का गठन करने वाले दुष्यंत चौटाला अपने पुराने विधानसभा क्षेत्र उचाना से चुनाव मैदान में जबकि उनकी मां इस बार डबवाली को छोडकऱ बाढड़ा से चुनावी रण में है। दुष्यंत के लिए अन्य सीटों के अलावा दोनों सीटों पर चुनाव जीतना प्रतिष्ठा का सवाल है। नई पार्टी होने के चलते दुष्यंत चौटाला पूरे प्रदेश में घूम रहे हैं। दुष्यंत चौटाला उचाना से पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं। उचाना क्षेत्र चौटाला परिवार का गढ़ रहा है।

सीएम खट्टर करनाल को दे पा रहे कम समय
मुख्यमंत्री मनोहर लाल पिछली बार की तरह इस बार भी करनाल से ही चुनाव लड़ रहे हैं। समूचे प्रदेश की जिम्मेदारी होने के चलते मुख्यमंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र में कम समय दे पा रहे हैं। यहां चुनाव की कमान चंडीगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन तथा अन्य नेताओं पर है। मुख्यमंत्री हरियाणा में अब तक 50 की करीब रैलियों को संबोधित कर चुके हैं। इसके बावजूद वह करनाल में भी लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
समय की बचत को उडऩ खटोले में सवार नेता जी...।
चुनावी सीजन में सभी नेता एक दिन में औसतन आधा दर्जन रैलियों को संबोधित कर रहे थे। ऐसे में सडक़ मार्ग से समय पर रैलियों में पहुंच पाना संभव नहीं है। जिसके चलते नेताओं द्वारा हेलीकाप्टर से प्रचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल हेलीकाप्टर से ही रैलियों में पहुंच रहे हैं। जजपा नेता दुष्यंत चौटाला, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी जहां हरियाणा में एक दिन में एक से अधिक रैली में जाने के लिए हेलीकाप्टर का सहारा ले रहे हैं वहीं बुधवार से लोसुपा सुप्रीमो राजकुमार सैनी भी हेलीकाप्टर से चुनाव प्रचार शुरू करने जा रहे हैं। सैनी अंतिम तीन दिनों में हेलीकाप्टर से पूरा हरियाणा मापेंगे। इसी तरह से केंद्र से हरियाणा में आने वाले भाजपा व कांग्रेस के नेता भी हेलीकाप्टर से ही रैली स्थल पर पहुंच रहे हैं।
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