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प्रकृति के आनंद के बीच धार्मिक आस्था का केन्द्र वनखण्डेश्वर महादेव दिल हो उठता बाग-बाग जब हरियाली के बीच बहता है झरना और बोलती है कोयल

Surendra Kumar Chaturvedi

Publish: Aug 13, 2019 19:55 PM | Updated: Aug 13, 2019 19:55 PM

Karauli

क्षेत्र के लोगों में मान्यता है कि जो यहां शिव आराधना करता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। सावन माह में इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। सावन माह में हर वर्ष कावडिय़े हरिद्धार से गंगाजल लाकर महादेव का अभिषेक करते हंै। अनेक श्रद्धालु पूरे सावन माह बिल्व पत्र चढ़ाकर खुशहाली की कामना करते है। मंदिर पर आए दिन धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं।

गुढ़ाचंद्रजी. समीप के भंवरवाड़ा गांव से आधा किमी दूर प्राकृतिक छटा के बीच स्थित वनखण्डेश्वर महादेव क्षेत्र के लोगों के लिए प्रमुख पर्यटन स्थल बना है। कुछ लोग यहां धार्मिक आस्था से आते हैं तो अनेक ऐसे हैं जो प्राकृति का आनंद लेने को इस मंदिर तक पहुंचते हैं। मंदिर के चारों ओर हरियाली से लकदक पहाडिय़ां यहां के प्राकृतिक सौन्द्रर्य को बढ़ाती हैं.। यहां बारिश के दौरान झरना बहता है और कोयल की मधुर ध्वनि मन मोह लेती है। हवा के झौंकों के बीच लहराते पेड़ों से बहती सुगंधित हवा से दिल बाग-बाग हो उठता है। करीब ६० फीट चढ़ाई के बाद शिवमंदिर में प्रकृति निर्मित रवेदार पत्थरों से बना स्यंवभू शिवलिंग विराजमान है। जिसका क्षेत्र में एक ज्योतिलिंग के रूप में अभिर्भाव हुआ है। जो सदियों से भक्तों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है।
क्षेत्र के लोगों में मान्यता है कि जो यहां शिव आराधना करता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। सावन माह में इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। सावन माह में हर वर्ष कावडिय़े हरिद्धार से गंगाजल लाकर महादेव का अभिषेक करते हंै। अनेक श्रद्धालु पूरे सावन माह बिल्व पत्र चढ़ाकर खुशहाली की कामना करते है। मंदिर पर आए दिन धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर पर आसपास के दर्जनों गांवों के लोग मनौती मांगने आते है। बुजुर्गो का कहना है कि करीब एक हजार वर्ष पहले पहाड़ी पर पहले गांव स्थापित था। लेकिन धीरे-धीरे लोग वहां से अन्य स्थानों पर चले गए। वही कुछ पहाड़ी से उतरकर नीचे जमीन पर आ गए। हालांकि पत्थरों से बने पुराने घर अभी भी मौजूद है। उसी समय का यह शिवलिंग बताया जाता है। लोग बताते है कि यह शिवलिंग जमीन के अंदर से निकला है।
तपोस्थली भी
लोगों ने बताया कि यह स्थान संतों की तपोस्थली है। यहां संतों ने धूणी रमाकर भोलेनाथ की तपस्या की है। यहां मंदिर में एक तरफ भोलेनाथ की प्रतिमा है।
वही दूसरी तरफ बालाजी सहित संतों का धूणा बना हुआ है। साथ ही संतों की समाधियां भी है। इस मंदिर पर महाशिवरात्रि पर हजारों लोग दर्शनों को आते हैं। इससे मेला जैसा माहौल रहता है।