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राजस्थान के हिण्डौन मेंं सावन की मल्हार के बीच रसीले मालपुओं की मिठास

Anil dattatrey

Publish: Aug 13, 2019 23:10 PM | Updated: Aug 13, 2019 23:10 PM

Karauli

The sweetness of the juicy Malpuae amidst the Malhar of Sawan in Hindaun, Rajasthan.Malpua of desi ghee tasted as people.Increased sales due to Rakshabandhan

लोगों के स्वाद चढ़े देशी घी के मालपुआ-रक्षाबंधन को लेकर बढ़ी बिक्री


हिण्डौनसिटी. चीनी की चाशनी से लवरेज मालपुओं का नाम आते ही किसी के मुंह में पानी आ सकता है। बाकई क्या स्वाद है सावन की मिठाई में। रसीले मालपुए ऐसी मिठाई है जिसे लोग अक्सर बरसात के दिनों में ही पसंद करते हंै।

रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए भक्त प्रहलाद की नगरी में देशी घी से निर्मित मालपुओं की बिक्री इन दिनों पूरे परवान पर है। पुराने बाजार में स्थित करीब एक दर्जन मिठाई की दुकानों पर गर्मा गर्म रसभरे मालपुओं की कडाही नजर आ रही है।


शहर के लोग दूर दराज के बड़े शहरों में रह रहे अपने मित्र और रिश्तेदारों के घर इस स्वीट चपाती को पहुंचाते है। देशी घी के मालपुओं का स्वाद लोगों को इतना सिर चढ़ रहा है कि प्रतिदिन ढाई से तीन क्विन्टल से अधिक मालपुओं की बिक्री हो रही है। खास बात यह भी है कि रसीले और खस्ता होने के कारण उम्र के सात से आठ दशक का पडाव पार कर चुके वृद्ध लोग भी बड़े चाव के साथ मालपुओं का लुत्फ उठाते नजर आ रहे हैं।


100 साल से हिण्डौन में बन रहे मालपुआ-
हलवाई मुकेश भगत, दीनदयाल बागरैनिया व देवेश गुप्ता ने बताया कि हिण्डौन में 100 से ज्यादा वर्ष पहले से ही मालपुआ बनाए जा रहे हैं। कुछ दशक पहले तक शहर की पुरानी आबादी स्थित केशवपुरा, नीमका बाजार, कटरा बाजार की कुछेक दुकानों पर ही मालपुआ बनते थे। लेकिन प्रसिद्धि बढऩे के साथ ही अब शहर के मनीराम पार्क, बयाना मोड़, चौपड़ सर्किल, डेम्परोड़ बाजार में भी 15 से 20 दुकानों पर मालपुआ बनाकर बेचे जा रहें हैं। गरम-गरम शक्कर की चाशनी से लबरेज देशी घी से बने रबडी के मालपुए खाने में तो स्वादिष्ट है ही, सेहत के लिए भी नुकसान दायक नहीं है।

 

हर रोज चट कर जाते 250 किलो से ज्यादा मालपुए-
हलवाई और मिठाई विक्रेताओं की मानें तो शहर में प्रतिदिन 250 से 300 किलो मालपुओं का बिक्री हो जाती है। एक किलो में करीब 40 मालपुए तुल जाते हैं। ऐसे में हिण्डौन में प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार मालपुए की बिक्री हो रही है। चूंकि रबडी और देशी घी से बने होने के कारण ये मालपुए आठ से 10 दिन तक खाए जा सकते हैं।


ऐसे तैयार होते हैं मालपुए-
रबड़ी से बने मालपुओं को बनाने के लिए दूध और मैदा काम में लिया जाता है। उत्तम फैट के 10 किलो दूध को लगातार उबालने के बाद गाढ़ा करके साढ़े चार किलो कर लिया जाता है। इस रबड़ीनुमा दूध में तीन सौ ग्राम मैदा मिला कर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल को देशी घी में डालकर जालीदार मालपुआ तैयार किए जाते हैं। कडक सिकाई के बाद मालपुओं को एक तार की चाशनी में डुबो दिया जाता है। चाशनी में केशर और इलायची मिलाने से मालपुओं का स्वाद और बढ़ जाता है। (पत्रिका संवाददाता)

फैक्ट फाइल-
-100 से ज्यादा वर्षों से हिण्डौन में बनाए जा रहे मालपुए।
-10 हजार मालपुओं की हर रोज होती बिक्री।
-40 मालपुए एक किलो पर तुलते है।
-300 रुपए प्रतिकिलो के भाव बिकते हैं देशी घी के मालपुए।