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राजस्थान के इस स्कूल में बालिका शिक्षा को बढ़ावे के दावे खोखले

Vinod Sharma

Publish: Aug 12, 2019 18:57 PM | Updated: Aug 12, 2019 18:57 PM

Karauli

करौली. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के राज्य सरकार तथा शिक्षा विभाग के दावे सपोटरा उपखण्ड मुख्यालय के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की हालत देखकर खोखले साबित हो रहे हैं।

करौली. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के राज्य सरकार तथा शिक्षा विभाग के दावे सपोटरा उपखण्ड मुख्यालय के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की हालत देखकर खोखले साबित हो रहे हैं। यह स्कूल आजादी के ६० वर्ष बाद भी उपेक्षाओं का शिकार है। कई समस्याओं से घिरा है। केन्द्र व राज्य सरकार नारी शक्ति को बढावा देने, बालिका शिक्षा को बढावा देने के लिए बेटी पढाओ, बेटी बचाओ का ढिंढोरा पीट रही है । लेकिन इस विद्यालय में पढने वाली छात्राएं समस्याओं से जूझ रह है।


यह है समस्याएं
कक्षा कक्षों में जगह का अभाव, कमरो में बारिश के दिनों में पानी टपकना, खिडकियां टूटी होने, पोषाहार धूप में छत पर पकाने, खेल मैदान नहीं होने आदि की समस्याएं हैं। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय समय-समय पर क्रमोन्नत तो होता गया, लेकिन इसमें सुविधाएं कुछ नहीं दी। दो मंजिला भवन मे संचालित विद्यालय की हालत शुरू से ही खस्ता है। जबकि शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालय किसी तरह पीछे नहीं है। विद्यालय परिवार अच्छा रिजल्ट देता आ रहा है। इसमें बालिकाओं की संख्या निरंतर बढ़ती रही है। कक्षा ६ से १२ वीं तक इस विद्यालय में इस समय करीब साढ़े तीन सौ छात्राएं हैं।


प्रार्थना के लिए भी नहीं जगह
प्रार्थना के समय छात्राओं की विद्यालय के गेट के बाहर आम रास्ते तक लाइन लग जाती है क्योकि प्रार्थना स्थल के लिए जगह का अभाव है। जगह कम होने से बाहर २५ मिनट तक बाहर खड़े रहकर ही प्रार्थना करनी पड़ती है। जबकि विद्यालय के सामने से आम रास्ता गुजरता है। वाहनों का आवागमन रहता है। प्रार्थना के समय दो अध्यापक खड़े रहते है। जो वाहनों का ध्यान रखते हैं।


कमरों की हालत खस्ता
कार्यवाहक प्रधानाचार्य शिवचरणलाल जाटव ने बताया कि विद्यालय में बैठने के लिए ७ कमरे हैं। बाकी में कार्यालय, प्रधानाचार्य, कम्प्यूटर लैब, पुस्तकालय, परीक्षा कक्ष, नेपकीन भंडार, स्टोर कक्ष आदि की व्यवस्था है। कक्षा ९ से १२ की छात्राओं को बैठने के लिए कमरे छोटे पड़ रहे हैं। छात्राओं की संख्या अधिक होने से समस्या आ रही है। प्रधानाचार्य ने बताया कि जगह का अभाव पढाई बाधित करता है। बारिश और गर्मी के दिनों में भी समस्या और बढ़ जाती है। इन दिनों बारिश में परेशानी अधिक हो रही है।


न शेड में संचालित रसोई घरटी
स्कूल की तीसरी मंजिल पर एक टीन शेड में रसोईघर संचालित है। पोषाहार को खुले में छत पर ही पकाना पड़ता है। विद्यालय में खेल मैदान नहीं होने से खेलकूद की गतिविधियां नहीं हो पाती है।


शिक्षकों की यह है स्थिति
बालिका विद्यालय में अक्टूबर २०१८ से प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। संस्कृत व्याख्याता, अंग्रेजी शिक्षक, कनिष्ट लिपिक एवं पुस्तकालय प्रभारी का पद कई वर्षों से रिक्त है। स्कूल में हिन्दी, संस्कृत, गृह विज्ञान विषय ही संचालित है। विज्ञान संकाय की कमी खलती है। विद्यार्थी विज्ञान में रुचि रखते हैं, लेकिन यह संकाय ही नहीं है। राज्य सरकार की उदासीनता से छात्राएं विज्ञान में आगे नहीं बढ़ पा रही है। विज्ञान में रुचि रखने वाली छात्राएं अपनी इच्छाओं का दमन कर कला वर्ग में प्रवेश लेने को मजबूर है। यहां की पूर्व प्रधानाचार्य शशि मीना ने बालिका विद्यालय में जगह की कमी को दूर करने के कई प्रयास किए, लेकिन कुछ नहीं हुआ।