स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

हे भगवान! सावन में शिव के साथ ये क्या किया

Anil dattatrey

Publish: Jul 20, 2019 22:54 PM | Updated: Jul 20, 2019 22:54 PM

Karauli

Oh God! What did this do with Shiva in Savan.Chaumukhi Shivaling took away from the temple breaking jalhari at night. The incident of baithak wale Hanuman temple of Bhalapura.Samaj Kantak carried out the tragedy.


रात में जलहरि तोड़ मंदिर से उठा ले गया चौमुखी शिवलिंग.भायलापुरा के बैठक वाले हनुमान मंदिर की घटना.समाजकंटक ने दिया वारदात को अंजाम

हिण्डौनसिटी.
सावन में लोग बील्व पत्रों में भोलेनाथ की पूजा करते हैं, लेकिन शहर के भायलापुरा में शुक्रवार रात अज्ञात व्यक्ति ने बैठक वाले हनुमान मंदिर में घुस शिवजी की जलहरि तोड़ दी और चौमुखी शिवलिंग को ले गया। शनिवार सुबह चार बजे शिव पूजा के लिए मंदिर पहुंची एक महिला को शिव परिवार की प्रतिमाओं के बीच शिवलिंग नहीं मिलने पर घटना का पता चला। महिला की सूचना मंदिर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने सावन माह में प्रतिमा जलहरि तोड़ शिवलिंग ले लाने पर रोष जताया है। इस संबंध में लोगों ने कोतवाली थाने में शिकायत पेश की है।

 


भायलापुरा में मंदिर के पासके लोगों ने बताया कि प्राचीन मंदिर में गत वर्ष की जीर्णोद्धार की शिव परिवार की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी। शुक्रवार शाम आम दिनों की भांति मंदिर में आरती हुई। आरोप है कि रात में किसी समाज कंटक ने मंदिर में घुस किसी चीज के प्रहार से जलहरि को आधार से तोड़ दिया। सुबह करीब 4 बजे निशा देवी महादेव की पूजा के लिए मंदिर में पहुंची तो अन्य प्रतिमाओं के बीच टूटी पड़ी जलहरि और शिवलिंग को गायब देख चौक गई।

उनकी सूचना पर पास के घरों से भी लोग निकल कर मंदिर पर आ गए। इस संबंध में बृजेश कुमार ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी। साथ ही मामले की शिकायत भी पेश की। भायलापुरा निवासी पूर्वपालिका अध्यक्ष मानसिंह गुर्जर ने बताया कि रात में सूने मंदिर में किसी समाजकंटक ने वारदात को अंंजाम दिया है।


आस्थाएं हुई आहत-
समाजकंटक की करतूत से सावन में शिव पूजा की रहे श्रद्धालुओं की आस्था आहत हुई। मंदिर में आम दिनों की भांति महिलाएं पूजा करने पहुंची, ऐसे में शिव परिवार के शिवलिंग नहीं होने पर महिलाओं अन्य प्रतिमाओं पर जलाभिषेक कर बील्व पत्र चढ़ाए जबकि शिवलिंग का संकेतिक पूजन ही हो सका।