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राजस्थान के करौली के आगर्री गांव में जैन व हिन्दू धर्म की मूर्तियों का अकूत भण्डार

Vinod Sharma

Publish: Sep 11, 2019 18:02 PM | Updated: Sep 11, 2019 18:02 PM

Karauli

करौली. हिण्डौन मार्ग पर बसे आगर्री गांव में प्राचीन सभ्यता का (Heritage is not getting protection in Karauli district) इतिहास दबा पड़ा है। इस गांव में हिन्दू व जैन धर्म की अनेक प्रतिमाएं पहाड़ी पर और जमीन में दबी है तो अनेक इधर-उधर बिखरी हैं।

करौली. हिण्डौन मार्ग पर बसे आगर्री गांव में प्राचीन सभ्यता का (Heritage is not getting protection in Karauli district) इतिहास दबा पड़ा है। इस गांव में हिन्दू व जैन धर्म की अनेक प्रतिमाएं पहाड़ी पर और जमीन में दबी है तो अनेक इधर-उधर बिखरी हैं। सरकारी संरक्षणके अभाव में यह एतिहासिक धरोहर खुर्द-बुर्द होती जा रही है। इस बारे में प्रशासन तथा पुरातत्व विभाग के अफसरों को इसकी जानकारी भी है लेकिन वे इसको संरक्षित करने को लेकर लापरवाही दर्शा रहे हैं।
इतिहासकार बताते हैं कि आगर्री गांव में विभिन्न मौकों पर की गई खुदाई में १२वीं शताब्दी की प्रतिमाएं निकली हैं। ये प्रतिमाएं जैन धर्म और हिन्दू धर्म की हैं। इसके अलावा भू गर्भ में प्राचीन सभ्यता का काफी खजाना दबा पड़ा है। इसको लेकर प्रशासन और पुरातत्व विभाग बेपरवाह ही रहे हैं। वर्षो से इस क्षेत्र में लगातार प्रतिमाओं के निकलने पर भी न प्रशासन ने रुचि दर्शायी और न पुरातत्व विभाग ने गंभीरता से काम किया।
खास बात तो यह है कि दो जैन मंदिर इस क्षेत्र में दबे बताए जाते हैं। इतिहासकार वेणुगोपाल शर्मा के अनुसार फारसी शोध के लेख व रियासतकालीन रिकॉर्ड में इन मंदिरों के दबे होने का उल्लेख भी है।
जहां करते खुदाई वहां निकलती मूर्तियां
ग्रामीण बताते हैं कि इस क्षेत्र में जमीन या पहाड़ में खुदाई करने पर हिन्दू व जैन धर्म की मूर्तियां निकल पड़ती है। यह स्थिति पिछले चार-पांच दशक से चली आ रही है। शुरू में ग्रामीण इन मूर्तियों का महत्व नहीं जान पाए। ऐसे में आगर्री गांव से सैंकड़ों बेशकीमती मूर्तियां चोरी चली गई। आगर्री की मूर्तियों की चोरी प्रदेश भर में चर्चित रही है। पुलिस रिकॉर्ड में भी आगर्री गांव से मूर्तियां चोरी का उल्लेख है। लोग बताते है कि अंतरराष्ट्रीय तस्कर ३०-४० वर्ष पहले ही बेशकीमती मूर्तियों को चुरा ले गए। तब ग्रामीण भी इस धरोहरों का महत्व नहीं समझ पाए। अब ग्रामीण इस बारे में जागरूक हुएहैं और इस धरोहर पर नजर रखकर चौकसी करते हैं। ग्रामीणों ने खुदाई में जब- तब निकली सैकड़ों मूर्तियों को एकत्र कर एक स्थान पर रखा हुआ है, जो आज भी ठीक हालात में है। अनेक खण्डित प्रतिमाएं गांव के आसपास बिखरी नजर आती हैं। पत्रिका टीम ने गांव में पहुंच देवी मंदिर, शिवालय व जैन मंदिरों की मूर्तियों को देखा।


विरासत की हो सांरसभाल
आगर्री गांव की विरासत को सरकार की ओर से संरक्षण की दरकार है। इससे देश के लोग प्राचीन सभ्यता से रूबरू हो सकेंगे। प्रमुख मूर्तियों को गांव के मंदिर के पास रखा हुआ है।
रामखिलाड़ी मीना, शिक्षा अधिकारी व गांव के निवासी


एक अच्छी सभ्यता
आगर्री गांव का श्रेष्ठतम इतिहास रहा है। एक अच्छी सभ्यता , यहां दबी हुई है। लेकिन सरकार का इस ओर ध्यान नहीं देना अफसोसजनक है। अब ग्रामीण इसकी चौकसी कर रहे हैं। जबकि पुरातत्व विभाग को इसे संभालने की जरूरत है।
संतराम मीना सामाजिक कार्यकर्ता आगरी गांव


12वीं शताब्दी कीमूर्तियां
आगर्री गांव में 12वीं शताब्दी की मूर्तियों के भंडार है। दो जैन मंदिर जमीन के अंदर दबे हुए है। फारसी शोध के लेख व रियासतकालीन रिकॉर्ड में इसका उल्लेख भी है।
वेणुगोपाल शर्मा इतिहासकार करौली


अधिकारियों को गांव में भेजेंगे
आगर्री गांव में पुरातत्व विभाग भरतपुर के अधिकारियों के दल को भेजेंगे। गांव में सर्वे व सत्यापन के बाद अगली कार्रवाई होगी।
एसएल चौधरी अधीक्षक पुरातत्व विभाग जयपुर।