स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

दूर होगी शक की बीमारी, इस तरह के इलाज वाला प्रदेश में पहला अस्पताल बनेगा हैलट

Alok Pandey

Publish: Jul 20, 2019 14:30 PM | Updated: Jul 20, 2019 14:30 PM

Kanpur

बार-बार हाथ धोना एक जटिल मानसिक बीमारी, दो तरह से होती है सर्जरी
शरीर में कंपन भी इसी श्रेणी की बीमारी, दवा बेअसर होने पर होगा ऑपरेशन

कानपुर। आपने कुछ ऐसे लोगों को देखा होगा जो देर तक नहाते हैं और बार-बार हाथ धोते हैं, या फिर किसी के छू लेने पर फिर हाथ धोते हैं। यह एक तरह की जटिल मानसिक बीमारी होती है। जिसमें व्यक्ति को हर बात पर शक या संदेह रहता है। वह सामान रखकर भूल जाता है या फिर ताला लगाने के बाद सोचता है कि घर की लाइट बंद की या नहीं। इसी तरह से पार्किंसन यानि शरीर में कंपन भी इसी से जुड़ी एक बीमारी होती है।

ऑपरेशन से दूर होती बीमारी
इस तरह की मानसिक बीमारी में पहले मरीज को दवाइयां दी जाती हैं। शुरूआती लक्षण होने पर दवाइयों से ही आराम मिल जाती है, लेकिन जिन मरीजों में यह बीमारी जटिल स्तर तक पहुंच जाती हैं उनकी सर्जरी करनी पड़ती है। इसमें दिमाग के सबसे जटिल हिस्से थैलमस और बेसल गैंगलिया से यह बीमारी कंट्रोल होती है। यहां का ऑपरेशन बेहद जटिल होता है।

दो तरह से होती सर्जरी
इस तरह की बीमारी में दो तरह से सर्जरी की जाती है। डॉ. मनीष सिंह के मुताबिक एक थैलमस के हिस्से में कुछ न्यूरांस को डैमेज कर देते हैं और दूसरे तरह की सर्जरी में ब्रेन की कुछ कोशिकाओं में छेद करके छोटा सा इलेक्ट्रोड लगा देते हैं। पार्किंसन में भी इलेक्ट्रोड काम करता है। यह बिल्कुल पेसमेकर की तरह ही काम करता है और यह बटन से नियंत्रित होता है जो ब्रेन के बाहरी हिस्से में लगाया जाता है।

बेहद महंगी है सर्जरी
इस तरह की सर्जरी बेहद महंगी होती है। देश के कुछ अस्पतालों में ही यह सुविधा फिलहाल मौजूद है। जिनमें इसका खर्च करीब पांच लाख रुपए आ रहा है। इसमें आयुष्मान योजना के जरिए मरीजों को लाभ मिल सकता है। आयुष्मान योजना से मरीजों को इलेक्ट्रोड खरीदने में परेशानी नहीं होगी। जल्द ही हैलट अस्पताल में भी इस तरह की सर्जरी शुरू हो जाएगी।