स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

पढ़ने का एेसा जुनून कि जब स्कूल जानें को नहीं मिला कोई साधन तो बच्चों ने खुद ही बना ली नांव

Akanksha Agrawal

Publish: Aug 11, 2019 12:03 PM | Updated: Aug 11, 2019 12:03 PM

Kanker

flood in Kanker: भारी बारिश में जब सडक़ें और गांव टापू का रूप ले चुके हैं तब भी यहां के स्कूली बच्चें नाव में सवार होकर स्कूल जा रहे हैं।

पखांजूर. छत्तीसगढ़ में बारिश (heavy rain in kanker) ने यहां की अर्थव्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। पर इन अव्यवस्थाओं के बावजूद यहां के स्कूली बच्चों का हौसला नहीं टूटा है। इसलिए भारी बारिश में जब सडक़ें और गांव टापू का रूप ले चुके हैं (flood in kanker) तब भी यहां के स्कूली बच्चें नाव में सवार होकर स्कूल जा रहे हैं।

दरअसल जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक की तस्वीर बारिश के मौसम में पूरी पोल खोलकर रख दी। एक ओर अंजारी नदी और दूसरी ओर कलरकूटनी नदी में आए उफान की वजह से कई गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। इस क्षेत्र में हाईस्कूल न होने की वजह से सैकड़ों छात्र छात्राओं को बरसात के दिनों में उफनती कलरकूटनी नदी को पार कर स्कूल जाना पड़ता है। पीवी 94 के हाईस्कूल पडऩे वाले 30 बच्चे नियमित पढऩे आते हैं।

कुछ दिन पहले इस नदी में ग्रामीणों ने लकड़ी की पुलिया बनाया था, लेकिन बारिश में वह भी बह गई। छात्रों ने बताया कि रोजाना जान जोखिम में डालकर टीन से बनी डोंगी के सहारे स्कूल जाने को मजबूर है। सरकार को हमारी परेशानियों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों का उदासीन रवैया देखने को मिल रहा है। इस बारे में जानकारी होने के बावजूद अभी तक किसी प्रकार की पहल नहीं हो रही है।

वहीं ग्रामीणों को रोजमर्रा के सामान के लिए उफनती नदी को पार करना पड़ता है। बरसात के दिनों किसी ग्रामीण की तबीयत बिगडऩे तो यहां संजीवनी एक्सप्रेस 108 नहीं पहुंच सकती है। जिसकी वजह से ग्रामीणों को काफी मशक्कत के बाद मरीज को इसी डोंगी के सहारे नदी पार कर स्वस्थ्य केंद्र पहुंचाना पड़ता है।

खुद नदी को नौका खेकर पार करते हैं छात्र
छात्रों ने बताया कि अंजारी नदी और दूसरी ओर कलरकूटनी नदी में आए उफान की वजह से कई गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। छात्र सुबह नदी के तट पर एकत्र होते हैं। सुबह और शाम को एक साल नाव से पार होते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि नदी में उफान आने के लिए बारिश के मौसम में इस तरह की परेशानी होती है। लोहे की लौका होने के कारण यहां कभी भी हादसा हो सकता है। पालकों ने बताया कि बार-बार शासन प्रशासन को अवगत करा चुके हैं। आज तक न तो पुल का निर्माण कराया गया न ही किसी प्रकार पहल होती है। अब नौका ही एक सहारा बना है। इसी से बच्चे स्कूल जाने को मजबूर हैं।

chhattisgarh inspiration की खबर यहां बस एक क्लिक में

Chhattisgarh से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter और Instagram पर ..

LIVE अपडेट के लिए Download करें patrika Hindi News

एक ही क्लिक में देखें Patrika की सारी खबरें