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मंत्री के आदेश का पुलिस ने दिया जवाब कहा - बिना सबूत के नहीं कर सकता कार्रवाही

Bhupesh Tripathi

Publish: Jul 16, 2019 19:52 PM | Updated: Jul 16, 2019 19:58 PM

Kanker

विधानसभा सत्र में सत्तापक्ष के विधायक शोरी के सवाल पर स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गयी उधर आनन-फानन में विभाग के आलाधिकारियों ने पंचायती मंत्री टीएस सिंह देव के माध्यम से जवाब दिया।

कांकेर। कोयलीबेड़ा विकास खंड में मितानिनों के प्रोत्साहन राशि में लाखों के घोटाले का मामला सोमवार को विधानसभा में उठा है। कांकेर विधायक शिशुपाल शोरी ने पंचायती मंत्री टीएस सिंहदेव (Ts singhdeo) से सवाल किया कि कांकेर के कोयलीबेड़ा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित कार्यक्रम में तीन साल में प्राप्त-व्यय राशि की जानकारी दें। अगर मितानिनों के प्रोत्साहन राशि में अनियमितता हुई हो तो जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों की खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में अवगत कराएं। इस सवाल पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।

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सत्तापक्ष के विधायक शोरी के सवाल पर स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची तो आनन-फानन में विभाग के आलाधिकारियों ने पंचायती मंत्री टीएस सिंह देव के माध्यम से जवाब दिया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से वर्ष 2017-18 तक चार करोड़ 74 लाख 83 हजार 561 रुपए का आवंटन प्राप्त हुआ था। मितानिनों के प्रोत्साहन राशि के तौर पर 4 करोड़ 39 लाख, 29 हजार 554 रुपए व्यय हुआ है। मितानिनों के प्रोत्साहन राशि में यहां लाखों की गड़बड़ी हुई है।

जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों ने पंचायती मंत्री के माध्यम से यह भी बताया कि कार्रवाई के लिए पत्र और नोटिस भी जारी किया गया है। मंत्री के जवाब पर पत्रिका टीम ने तहकीकात किया तो दोषियों के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं की गई है। यानी पंचायती मंत्री को स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों ने सदन में अधूरी जानकारी उपलब्ध करा दी है।

इस मामले में पड़ताल में जानकारी मिली कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पंचायती मंत्री को झूठी रिपोर्ट सौंप दी है। यानी जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा कर दिया। कार्रवाई के लिए जो पत्र जारी हुए, पालन अधिकांश का नहीं हुआ है। पखांजूर पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिस पत्र को कोयलीबेड़ा बीएमओ ने पुलिस को सौंपा है वह अधूरा है।

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रत्ना सरकार और मनमत ढाली के खिलाफ अपराध दर्ज करने के लिए जो पत्र स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस के समक्ष सौंपा है, उस आधार पर पुलिस अपराध दर्ज करने से हाथ खड़ा कर दिया है। चार माह पहले जिन्हें जांच टीम ने दोषी करार दिया था उनके खिलाफ पुलिस अपराध दर्ज करने के बजाए स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।

मनमथ और रत्ना सरकार पर एफआईआर नहीं
पंचायत मंत्री को पत्र के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों ने सदन के लिए जानकारी भेजा कि मनमथ ढाली और रत्ना सरकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को पत्र प्रेषित किया गया है। वहीं पुलिस के अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अधूरे दस्तावेज के साथ पत्र भेजा है। ऐसे में अपराध दर्ज नहीं किया जा सकता है। यानी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ही गलत दस्तावेज थाना प्रभारी को सौंप दिए हैं। कहीं न कहीं अफसर ही दोषियों को बचाने के लिए चार माह से अपराध दर्ज नहीं करा रहे हैं।

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प्रदीप डडसेना को नहीं किया गया है पदमुक्त
स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों ने सदन में पंचायत मंत्री टीएस सिंह देव को पत्र के माध्यम से जानकारी दिया है कि जिला समन्वयक मितानिन कार्यक्रम को पद मुक्त करने के लिए संचालक राज्य स्वास्थ्य संचालक रायपुर को भेजा गया है। पर मदमुक्त किया गया या नहीं स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों को जानकारी नहीं है। बता दें की प्रदीप डडेसना इसी पद पर रायगढ़ में नौकरी कर रहा है। मितानिनों के प्रोत्साहन राशि में गड़बड़ी की जांच 23 फरवरी को हो चुकी है। स्वाथ्स्य विभाग की कार्रवाई शुन्य है।

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