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मोटी पगार पाने वाले शिक्षक स्कूलों से रहते हैं गायब, इस मामले में अधिकारी ने कही ये बात

Chandu Nirmalkar

Publish: Jul 18, 2019 18:51 PM | Updated: Jul 18, 2019 18:51 PM

Kanker

CG Shikshakarmi: मजेदार बात यह कि संकुल समन्वयक खाली स्कूल का ही दौरा कर वापस लौट जाते हैं।

पखांजूर. अंचल के स्कूलों (Govt School) में मोटी पगार पाने वाले अधिकांश शिक्षक (Teacher) विद्यालय से गायब रहते हैं। स्कूल से शिक्षकों के नदारद रहने से पठन-पाठन में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। बार-बार पालकों द्वारा ब्लॉक के अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

दरअसल ब्लॉक के अंतिम छोर ओरछागांव बालक आश्रम के प्राथमिक शाला में मोटी तनख्वाह लेने वाले शिक्षक गायब थे। ओरछा प्राथमिक शाला में 4 शिक्षक पदस्त हैं, मगर सप्ताह के पहले दिन ही स्कूल आते हैं। बाकी पांच दिन स्कूल नहीं आते हैं। शिक्षकों की अनुपस्थिति से पठन-पाठन पर असर पड़ रहा है। मजेदार बात यह कि संकुल समन्वयक खाली स्कूल का ही दौरा कर वापस लौट जाते हैं।

यह बता दूं कि यह वही ओरछा गांव है, जहां आश्रम अधीक्षक के लापरवाही के चलते गत साल एक मासूम बच्चे की मलेरिया बुखार से मौत हो कई थी। एक ओर जहां केंद्र सरकार राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के स्तर में उच्च एवं गरीब बच्चों को आश्रमों में आश्रय देकर शिक्षा देने की योजना में करोड़ों खर्च कर रहा है। वहीं शासकीय स्कूलों के शिक्षक मोटी पगार लेकर अपने जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहे हंै।

एक साल पहले अधीक्षक द्वारा सड़ी गली सब्जी और एक्सपायर वेसन पैकेट की खबर पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। ओरछा गांव बालक आश्रम की हालत दयनीय हैं। सुबह 19 बच्चों को नास्ते में पोहा तो नसीब हुआ था, मगर दोपहर का खाना नहीं मिला। क्योंकि माध्यन भोजन बनाने वाले रसोइया शिक्षकों के साथ-साथ अनुपस्थित था। आश्रम के चपरासी ने कहा साहब की कुछ बता सकते हैं, मैं तो चपरासी हूं। शिक्षकों के साथ आश्रम अधीक्षक भी सुबह से स्कूल परिसर में नहीं थे। जिलेभर के शासकीय स्कूलों का यही हाल है।

अधिकारियों को भेजकर जांच कराता हूं। यदि पिछले साल भी ऐसा हुआ था तो ठीक नहीं है।
विवेक दलेला, सहायक आयुक्त

आज कोई भी शिक्षक नहीं आया है। इन बच्चों के लिए दोहपर का खाना नहीं बना है।
मोना गोटा, छात्रवास अति. शिक्षिका

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