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वल्र्ड अल्जाइमर्स डे : बूढ़ों में ही नहीं, युवाओं में भी बढऩे लगी है भूलने की आदत

Harshwardhan Singh Bhati

Publish: Sep 22, 2019 15:00 PM | Updated: Sep 22, 2019 15:00 PM

Jodhpur

आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और अवसाद के कारण कई नए तरह के रोगों से लोगों का सामना हो रहा है। जिन्हें अभी तक बढ़ती उम्र के संकेत समझकर नजरंदाज किया जाता रहा था, वही लक्षण जब युवाओं और 55 वर्ष से कम उम्र के लोगों में नजर आने लगे तो स्वास्थ्य जगत का ध्यान गया। इन्हीं रोगों में से एक है अल्जाइमर।

अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. गजनी में आमिर खान और फिल्म यू मी और हम में काजोल का किरदार याद होगा...। भूलने की आदत के किरदार में कैसे ये दोनों परेशान रहते और उससे ज्यादा परेशानी उनके परिजनों व परिचितों को होती थी। वर्ष 2008 में आई फिल्म यू मी और हम में भले ही अल्जाइमर से पीडि़त काजोल के साथ अजय देवगन की लव स्टोरी इस रोग के बावजूद परवान चढ़ी लेकिन हकीकत में यह रोग कई बार रिश्तों के टूटने का कारण भी बन जाता है। इससे इतर ऐसे भी उदाहरण मिले हैं कि अल्जाइमर से पीडि़त की सेवा में परिजनों ने धैर्य, हिम्मत व पूरी ऊर्जा लगा दी। 21 सितम्बर वल्र्ड अल्जाइमर डे के रूप में मनाया जाता है। जानते हैं इस रोग के बारे में।

इसलिए पूरी दुनिया मनाती है यह दिवस
आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और अवसाद के कारण कई नए तरह के रोगों से लोगों का सामना हो रहा है। जिन्हें अभी तक बढ़ती उम्र के संकेत समझकर नजरंदाज किया जाता रहा था, वही लक्षण जब युवाओं और 55 वर्ष से कम उम्र के लोगों में नजर आने लगे तो स्वास्थ्य जगत का ध्यान गया। इन्हीं रोगों में से एक है अल्जाइमर। जिसके कारण व्यक्ति का जीवन कठिनाइयों से भर जाता है। इसका सामान्य रूप डिमेंशिया है। यह निरंतर बढ़ते जाने वाला मस्तिष्क का रोग है। अल्जाइमर रोग के बारे में जागरूकता के लिए अब दुनिया भर में 21 सिंतबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाने लगा है। 1906 में जर्मन के न्यूरोलॉजिस्ट एलोइस अल्जाइमर ने इस बीमारी का पता लगाया था और इन्हीं के नाम पर इस बीमारी का नाम रखा गया है।

तनाव नहीं रखें
यदि आप सुबह से शाम तक अत्यधिक काम करने की प्रवृत्ति रखते हंै तो सजग रहने की जरूरत है। आपको अल्जाइमर रोग होने की संभावना है। यह एक तरह का मानसिक विकार है। इसमें कारण मरीज की स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है और इसका असर दिमाग पर पड़ता है। आमतौर पर यह मध्यम उम्र या वृद्धावस्था में दिमाग के टिशू को नुकसान पहुंचने के कारण होता है। आजकल तो युवाओं को भी होने लगा है। यह डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, जिसका असर व्यक्ति की स्मरण शक्ति,सोचने की क्षमता, रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ता है।

जानकारों के मुताबिक अल्जाइमर रोग विकासशील देशों में तीव्रता के साथ बढ़ रहा है। अधिकांश में इसकी शुरुआत अक्सर 65 वर्ष की उम्र के बाद होना शुरू हो जाती है। इसमें दिमाग की कोशिकाएं डीजनरेट होकर मृत होने लगती है। अल्जाइमर का सही कारण अब तक पता नहीं लग पाया है। हालांकि पाया गया है कि यह आनुवंशिक कारणों, तनाव,सिर की चोट, उच्च रक्तचाप व मोटापे के मरीजों में अधिक होता है। अनुभवी न्यूरोलोजिस्ट, साइकेट्रिस्ट, क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट,फिजिकल थेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट की टीम मिलकर अल्जाइमर की जांच, निदान और देखभाल कर सकती है।

ये हैं लक्षण

- चिड़चिड़ापन आ जाना।
- बेचैनी, एकाग्रता में कमी, बेवजह कहीं भी घूमते रहना।
- ज्यादातर समय अकेले बिताना भी है।
- दैनिक गतिविधियां भूलने लगता है यानी इंसान खुद के परिजनों को भूल जाता है।

इनका कहना है
शुरुआत में लक्षणों को देखकर अक्सर लोग यह समझते हैं कि ऐसा उम्र बढऩे के कारण हो रहा है। हालांकि अल्जाइमर का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआती अवस्था में निदान के द्वारा मरीज के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। इसके लिए पूर्ण जांच एवं न्यूरो इमेजिंग की जरूरत होती है।
- डॉ. जीडी कूलवाल, वरिष्ठ आचार्य व एचओडी, मनोविकार विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज