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थार में खत्म होने की कगार पर पहुंचे भेडिय़े, लकड़बग्घा, सियार, मरु बिल्ली, मरु लोमड़ी की जनसंख्या भी कम

Harshwardhan Singh Bhati

Publish: Sep 17, 2019 08:47 AM | Updated: Sep 17, 2019 08:47 AM

Jodhpur

थार मरुस्थल की खाद्य शृंखला के शीर्ष पर बैठा प्रमुख मांसाहारी जीव भेडिय़ा (केनिस ल्युपस) विलुप्त होने के कगार पर है। प्रमुख चार जिलों में करीब 80 भेडि़ए रह गए हैं। बढ़ते शहरीकरण और भोजन की कमी से अन्य मांसाहारी जीव लकड़बग्घा, सियार, मरु बिल्ली और मरु लोमड़ी की जनसंख्या भी घट गई है।

गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. थार मरुस्थल की खाद्य शृंखला के शीर्ष पर बैठा प्रमुख मांसाहारी जीव भेडिय़ा (केनिस ल्युपस) विलुप्त होने के कगार पर है। प्रमुख चार जिलों में करीब 80 भेडि़ए रह गए हैं। बढ़ते शहरीकरण और भोजन की कमी से अन्य मांसाहारी जीव लकड़बग्घा, सियार, मरु बिल्ली और मरु लोमड़ी की जनसंख्या भी घट गई है। जंगली बिल्ली नाम की बची है। लंबे समय से जंगली बिल्ली रिपोर्ट नहीं हुई है। पैंथर अरावली रेंज से रास्ता भटककर कभी-कभार नजर आ जाता है। यह खुलासा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के प्राणी शास्त्र विभाग के शोध में हुआ है।

प्रो. एलएस राजपुरोहित के निर्देशन में शोध करने वाले सीएसआइआर सीनियर रिसर्च फेलो डॉ. आजाद ओझा ने बताया कि सात साल पहले वे बालेसर गए थे तब वहां काफी भेडि़ए थे, अब एक भी नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय पहले एक भेडिय़ा आया था, जिसे गांव वालों ने मार डाला। भेडिय़ों की संख्या कम होने से नील गाय और सुअरों की संख्या बढ़ गई जो खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वर्ष 2015 में सरदारसमंद के पास वन अधिकारी गोविंदसिंह भारद्वाज ने 9 भेडि़ए एक साथ रिपोर्ट किए थे। भेडिय़ा मानव बस्ती के आसपास रहता है क्योंकि वहां पालतु जानवर खाने को मिल जाते हैं। चिंकारा और ब्लैक बक कम होने से भी भेडिय़ों का भोजन कम हो गया है।

अब यहीं बचे हैं मांसाहारी जीव
भेडिय़ा अब जोधपुर के भोपालगढ़, नागौर, बाड़मेर के बायतु और बीकानेर के मथानिया कोचर में बचा है। लकड़बग्घे 40 से भी कम हैं। हालांकि बाड़मेर के सिवाणा, अरावली और जवाई बांध में काफी लकड़बग्गे हैं। जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर के इलाकों में सियार अधिक संख्या में हैं। मरु बिल्ली बाड़मेर, जोधपुर के ओसिंया व लोहावट क्षेत्र में भी मिलती है।

थार में मांसाहारी जीव

मांसाहारी जीव ------2019 ------- 2009

भेडिय़ा -------- 80 -------- 170
लकड़बग्घा --------40 --------100
सियार -------- 250 --------515
भारतीय लोमड़ी----50 --------115
मरु लोमड़ी -------410 --------730
मरु बिल्ली --------85 --------210
जंगली बिल्ली ----- वैरी रेअर -------- रेअर

(जेएनवीयू के अनुसार अनुमानित संख्या)

संख्या कम होने के कारण

- कृषि क्षेत्रफल का बढऩा
- विभिन्न प्रकार के खनन
- आवास में कमी आना
- शहरीकरण
- सडक़ निर्माण जैसे विकास कार्य
- आवारा कुत्तों की समस्या
- शिकार

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पारिस्थितिकी तंत्र गड़बड़ा रहा

मांसाहारी जीव खत्म होने से पारिस्थितिकी तंत्र गड़बड़ा रहा है। ग्रामीण स्तर पर लोगों को जागरूक कर इन्हें विलुप्त होने से बचाया जा सकता है।
- डॉ. आजाद ओझा, सीनियर रिसर्च फेलो, जेएनवीयू जोधपुर